मिर्जापुर के ‘गुरु’ ने प्रयाग संगीत समिति की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में बिखेरा जलवा, तबला वादन में प्राप्त किया द्वितीय स्थान

अरविंद शर्मा जिला ब्यूरो चीफ नज़र इंडिया 24
मिर्जापुर। सुर, ताल और लय के संगम की धरती प्रयागराज में आयोजित प्रतिष्ठित प्रयाग संगीत समिति के शताब्दी वर्ष समारोह में जनपद मिर्जापुर के उभरते सितारे ‘गुरु’ ने अपनी थाप से सबका दिल जीत लिया। संगीत जगत की इस ऐतिहासिक संस्था द्वारा आयोजित प्रदेश स्तरीय संगीत एवं नृत्य प्रतियोगिता में 11 वर्षीय गुरु ने तबला वादन (सोलो) में द्वितीय स्थान प्राप्त कर न केवल अपने माता-पिता, बल्कि पूरे जिले का मान बढ़ाया है।
प्रयाग संगीत समिति के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में यह भव्य कार्यक्रम 14 मार्च से शुरू होकर 20 मार्च 2026 तक आयोजित किया गया। सात दिनों तक चले इस कला महाकुंभ में उत्तर प्रदेश के कोने-कोने से आए नन्हे और युवा कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता का सफल संचालन समिति के अध्यक्ष अजय कुमार, सचिव अरुण कुमार और कोषाध्यक्ष कुशलकांत की देखरेख में संपन्न हुआ। निर्णायक मंडल ने इतनी कम उम्र में गुरु की स्पष्ट थाप और कठिन लयकारी की जमकर सराहना की।गुरु अपनी संगीत यात्रा ‘संगीत संकल्प एकेडमी’ के माध्यम से तय कर रहे हैं, जहाँ वे संगीत आचार्य पृथ्वी कुमार नारंग जी से तबला वादन की बारीकियां सीख रहे हैं। प्रतियोगिता के दौरान मंच पर गुरु की प्रस्तुति को और अधिक प्रभावशाली बनाने में आदर्श विश्वकर्मा ने हारमोनियम पर मधुर ‘लहरा’ प्रदान कर संगीत की अद्भुत जुगलबंदी पेश की। दोनों कलाकारों के बीच के इस सामंजस्य ने वहाँ मौजूद श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गुरु केवल संगीत में ही नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी अत्यंत मेधावी हैं। वे नगर के देहात कोतवाली रोड स्थित अग्रसेन ग्लोरियस स्कूल में कक्षा पाँच के छात्र हैं। विद्यालय के शिक्षकों के अनुसार, गुरु हर वर्ष अपनी कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करते हैं, जो उनके अनुशासन और एकाग्रता को दर्शाता है। उनके पिता, जो मिर्जापुर दीवानी कचहरी में एक प्रतिष्ठित अधिवक्ता (वकील) हैं, अपने पुत्र की इस दोहरी सफलता पर गर्व महसूस करते हैं।गुरु की प्रतिभा केवल प्रदेश स्तर तक ही सीमित नहीं है। हाल ही में उन्होंने नई दिल्ली द्वारा आयोजित सांस्कृतिक प्रतिभा खोज छात्रवृत्ति योजना (2025-26) के तहत 10 जनवरी 2026 को आयोजित चयन परीक्षा में भी प्रतिभाग किया है। हालांकि इस परीक्षा का परिणाम अभी आना शेष है, लेकिन उनकी कला के प्रति निष्ठा और समर्पण को देखते हुए सुखद परिणाम की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। प्रयागराज में मिली इस बड़ी सफलता के बाद गुरु को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।




