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माधव स्वरूप भगवान श्री कृष्ण की भावामृत धारा में अवगाहित २४३वीं कल्पकथा साप्ताहिक काव्यगोष्ठी”

कल्प सर्जना शब्द आधारित दैनिक काव्य सृजन आयोजन में नित्य प्रवाहित होगी काव्य गंगा। - कल्पकथा परिवार

 

प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम हिन्दी भाषा सनातन संस्कृति एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था की संवाद प्रभारी श्रीमती ज्योति राघव सिंह ने बताया कि संस्था परिवार के तत्वावधान में आयोजित २४३वीं साप्ताहिक पौराणिक एवं भक्ति प्रसंग आधारित ऑनलाइन काव्यगोष्ठी का आयोजन माधव स्वरूप भगवान श्रीकृष्ण विषय पर अत्यंत श्रद्धा, सौंदर्य एवं भावमाधुर्य के साथ संपन्न हुआ। इस अनुपम आयोजन में भक्ति, दर्शन और काव्य का अद्वितीय समन्वय दृष्टिगोचर हुआ, जहाँ प्रत्येक रचना श्रीकृष्ण के माधुर्य, करुणा एवं दिव्यता की सजीव अभिव्यक्ति बनकर उभरी।

ओज शैली के आशुकवि भास्कर सिंह माणिक एवं डॉ. मंजू शकुन खरे के अत्यंत सुसंगठित एवं प्रभावपूर्ण ढंग के संचालन के कार्यक्रम की अध्यक्षता आदरणीया डॉ मीनाक्षी दुबे ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. मोनिका रघुवंशी की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष ऊँचाई प्रदान की।

कार्यक्रम का शुभारंभ विजय रघुनाथराव डांगे द्वारा संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना के सुमधुर गायन से हुआ, जिसने वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। तत्पश्चात प्रथम चरण में देश के विभिन्न अंचलों से जुड़े विद्वान सृजनकारों अमित पंडा अमिट रोशनाई, पूनम सिंह प्रिय श्री, भावना कौर, आ. मनवीन सिंह, सुन्दरलाल जोशी सूरज, विजय रघुनाथराव डांगे, दीपिका वर्मा, ज्योति प्यासी, अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप, रमापति मौर्य, प्रेमलता कुमारी, नैन्सी श्रीवास्तव, सविता बाँगड सुर, भगवानदास शर्मा प्रशांत, डॉ अंजू सेमवाल, अतुल कुमार खरे, डॉ. श्याम बिहारी मिश्र, दिनेश कुमार दुबे, डॉ मीनाक्षी दुबे, डॉ मोनिका रघुवंशी, भास्कर सिंह माणिक, डॉ मंजू शकुन खरे, दीदी राधा श्री शर्मा, पवनेश मिश्र ने अपनी उत्कृष्ट काव्य प्रस्तुतियों द्वारा माधव स्वरूप की विविध छवियों को भावपूर्ण अभिव्यक्ति प्रदान की।

भक्तिधारा के पावन कार्यक्रम के दौरान कल्पकथा परिवार ने नवीन एवं शब्द आधारित दैनिक काव्य सृजन कार्यक्रम की घोषणा की जिसमें सोमवार से शनिवार सप्ताह में छह दिन प्रति दिन पटल प्रभारियों के कुशल संयोजन में सतत काव्य सृजन किया जाएगा। वरिष्ठ साहित्यकार एवं विद्वान काव्य मनीषी डॉ श्याम बिहारी मिश्र, विजय रघुनाथराव डांगे, अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप जी के मार्गदर्शन में पटल प्रभारी के रूप में क्रमशः सोमवार को डॉ जया शर्मा प्रियंवदा, मंगलवार को ज्योति प्यासी, बुधवार को दीपिका वर्मा, गुरुवार को प्रेमलता कुमारी, शुक्रवार को जीतेन्द्र शास्त्री, एवं शनिवार को अमित पण्डा अमिट रोशनाई सतत प्रयासों को ऊर्जान्वित करेंगे।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में राष्ट्रभक्ति के भावों से ओतप्रोत राष्ट्रगीत “वन्दे मातरम्” का सामूहिक गायन किया गया, जिसने आयोजन को आध्यात्मिकता के साथ-साथ राष्ट्रीय चेतना से भी ओतप्रोत कर दिया। अंत में दीदी राधा श्री शर्मा द्वारा आमंत्रित अतिथियों, सहभागी साहित्यकारों एवं समस्त दर्शक श्रोताओं के प्रति हृदयपूर्ण आभार एवं कृतज्ञता ज्ञापित की गई। इस प्रकार यह काव्यगोष्ठी न केवल भक्ति और साहित्य का संगम बनी, बल्कि संस्कृति, संवेदना एवं सृजनशीलता के एक दिव्य उत्सव के रूप में स्मरणीय हो गई।

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