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शिक्षक की आत्मबीती” – सुमन दूबे साऊंखोर बड़हलगंज गोरखपुर

 

मैं एक शिक्षक हूँ, और मेरा जीवन केवल एक पेशा नहीं बल्कि एक मिशन है। जब मैं इस मार्ग को चुनी, तब मेरे मन में यह दृढ़ संकल्प था कि मैं शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाऊँगी। एक शिक्षक के रूप में मेरा हर दिन नई चुनौतियों और नए अनुभवों से भरा होता है।
मेरा जन्म एक साधारण परिवार में हुआ, जहाँ संसाधन सीमित थे, लेकिन सपने बड़े थे। बचपन से ही मुझे पढ़ने और दूसरों को सिखाने में रुचि थी। अपने गुरुओं से प्रेरित होकर मैंने यह निर्णय लिया कि मैं भी एक दिन शिक्षक बनकर ज्ञान का दीप जलाऊँगी। कड़ी मेहनत और लगन के बाद जब मैंने पहली बार कक्षा में कदम रखी, तो मन में उत्साह के साथ-साथ थोड़ी घबराहट भी थी। लेकिन छात्रों के उत्सुक चेहरों ने मेरी सारी झिझक दूर कर दी।
एक शिक्षक के रूप में मेरी जिम्मेदारी केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है। मैं अपने विद्यार्थियों को जीवन के मूल्य, नैतिकता, अनुशासन और जिम्मेदारी का महत्व भी सिखाता हूँ। हर छात्र मेरे लिए अलग है—कोई पढ़ाई में तेज होता है, तो कोई थोड़ा कमजोर। मेरा प्रयास रहता है कि हर बच्चे को उसकी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने में मदद करूँ।
मेरे जीवन में कई ऐसे पल आए हैं, जब चुनौतियाँ बहुत कठिन लगीं। कभी संसाधनों की कमी, तो कभी छात्रों की व्यक्तिगत समस्याएँ सामने आईं। फिर भी, मैंने कभी हार नहीं मानी। मैं हमेशा यह सोचकर आगे बढ़ता रहा कि मेरे प्रयास से किसी एक छात्र का भी जीवन बेहतर हो सकता है, तो मेरा परिश्रम सफल है।
जब मेरे पढ़ाए हुए छात्र जीवन में सफलता प्राप्त करते हैं, अच्छे इंसान बनते हैं और समाज में अपना योगदान देते हैं, तब मुझे अपार खुशी और गर्व का अनुभव होता है। यही मेरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। एक शिक्षक के रूप में मुझे भले ही बहुत अधिक भौतिक सुख-सुविधाएँ न मिलें, लेकिन जो सम्मान और संतोष मुझे मिलता है, वह अनमोल है।
मेरा छोटा भाई एक दिन अचानक आकर कहता है दीदी तुम्हारी पढ़ाई हुए एक छात्रा से मुलाकात हुई और वह आज हाईकोर्ट इलाहाबाद में वकील है। वह आपको पूछ रही थी यह सुनकर अपार हर्ष हूआ कि मैं बात नहीं सकती।
अंत में, मैं यही कहना चाहूँगा कि एक शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला नहीं होता, बल्कि वह समाज का निर्माता होता है। मैं अपने इस कर्तव्य को पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाने का प्रयास करती रहूँगी, ताकि मैं आने वाली पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य में अपना योगदान दे सकूँ।

सुमन दूबे साऊंखोर
बड़हलगंज गोरखपुर

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