आकर्षण — बबीता शर्मा

आज यदि नजर उठाकर देखा जाए तो चहुं ओर आकर्षण रूपी अजगर अपना फन फैलाए वर्तमान और भविष्य अपना ग्रास बना रहा है जिसके कारण सबकुछ तिमिरमय रूपी कूप में दफन होता नजर आ रहा है ।
यदि विभिन्न पहलुओं को केंदित कर यदि इस ओर ध्यान न दिया गया तो सब जल कर रख हो जाएगा ।
बाजार में टंगे छोटे छोटे कपड़े जोकि छोटी और बड़ी तो क्या वृद्धाओं को भी अपनी ओर खींच रहा है जो उनके तन पर सजकर हमारी सभ्यता और संस्कृति पर जहर कर असर डाल रहा है ।दूसरी ओर सिनेमा की रंगीन दुनिया से प्रभावित हमारी सभी युवा पीढ़ी सच्चाई के पथ से भ्रमित हो रही है । तीसरा सीरियल में दिखाई जाने वाली कई कई शादियां जो असल जीवन में लोगों को कठपुतली का खेल खेलने के लिए लालायित कर रही है ।समाज में यह एक विष की भांति फैल रहा है जिसका परिणाम बहुत ही घातक दिखाई पड़ता है ।
शादी होने के कुछ दिन बाद ही संबंध विच्छेद के मामले बढ़ते ही जा रहे है ।ये सब बढ़ते आकर्षण का ही दुष्प्रभाव कहा जा सकता है ।
सहनशीलता की कमी और शादी के बाद भी कर्तव्यनिष्ठता की कमी समाज को ग्रस रही है ।
असल जिंदगी प्राकृतिक कम बाहरी दिखावा ज्यादा बन गई है । चौथा मोबाइल का आकर्षण बच्चों को मानसिक और शारीरिक दोनों ही तरफ से खा रहा है । आज की पीढ़ी तो खेल की इतनी एडिक्ट हो गई है खाना चाहे न मिले लेकिन खेल जरूरी उनकी स्वास बन गया है ।
पांचवा बाजार में टंगी पेकिट की खाने की चीजें बच्चों को दिमागी शक्ति को हर पल क्षीण कर रही है जिसके कारण न जाने कितनी ही खतरनाक बीमारियां हो रही है ।
यदि यह आकर्षण इसी प्रकार हमे और हमारी पीढ़ी को अपना ग्रास बनाता रहा तो शून्य होने में देर न लगेगी ।
आवश्यकता है संभालने की नहीं तो काल निश्चित कर सकता हमारी शून्यता को ।
बबीता शर्मा



