कब तक फरियाद करेंगे,अब खुद ही इंसाफ करेंगे — बंदना मिश्रा देवरिया उत्तर प्रदेश

आज अपने देश में कोई मां,बहन बेटी सुरक्षित नहीं है ।हैवानों की नजर पड़ने की बस देर है। यहां ना छह साल की बच्ची सुरक्षित है ना साठ साल की बुढ़िया।हवस के दरिंदो को उमर नहीं दिखती बस अपनी आग मिटानी है।शर्म नहीं आती उन कमीनो को।जब से अखबार में उस मासूम बच्ची के बारे में पढ़ा है मन व्याकुल हो गया हो गया है और उन दरिंदो के प्रति नफ़रत इतनी बढ़ गई है कि……..
मासूम की मासूमियत पर दया ना आई हैवान बना वो।
थाना पुलिस कोर्ट कचहरी के ना उसको चक्कर लगवाओ।
गलती हो गई छोड़ दो बेचारे को बस बेचारा बना कर के।
छीन लो उससे उनकी मर्दानगी मर्द होने का एहसास मिटा दो।
बस उन दरिंदो के साथ ऐसा ही होना चाहिए।अगर ऐसा कानून बन गया तो किसी की हिम्मत नहीं होगी वो हवस की नजर से किसी मां बहन बेटी की तरफ आंख उठा कर भी देखे।
और यह सजा हवस के पुजारियों को उनके घर वालों को ही देना चाहिए।ऐसे भाई,बाप और पति को मर्द होने का एहसाह ही मिटा दे।और अपनी जिम्मेदारी निभाए।वो जिए मगर उनको अपने जीने पर अफ़सोस हो और खुद ही मरने की दुआ करे ।
बंदना मिश्रा
देवरिया उत्तर प्रदेश




