( धर्म ध्वजा आरोहण – सम्पूर्ण गीत ) संभवामि युगे-युगे… लेखक व कवि देवेन्द्र सिंह

दिनकर ने जब आज गगन से भू का दृश्य निहारा होगा।
सूर्य-वंश की पुण्य ध्वजा का देखा दिव्य नजारा होगा।।
अनायास आशीष हृदय के
रश्मि रूढ़ हो आए होंगे ।
सुख के अश्रु सलिल से भीगी
आँखों को सरसाए होंगे ।
कलश दुआ का शीश पलट कर नृप का जन्म संवारा होगा।।
जगे पुनः सौभाग्य धरा के
कण- कण पर सुख बरसाया है ।
देवलोक के अधिपति का भी
विह्वल हो मन हरषाया है ।
ध्वजा बढ़ी होगी जब ऊपर सुर- कुल राम पुकारा होगा ।।
सरयू की शीतल जलधारा
कल -कल कर के इठलाई है ।
पुलकित हुई अयोध्या नगरी
सदियों बाद मुस्कराई है ।
बलिदानों का दर्द घनेरा सुख के पल से हारा होगा ।।
हम बड़भागी मनुज मात्र सब
नयन हमारे धन्य हो गये ।
हे ! नरेन्द्र तुम राम काज कर
पुरुषों में पर्जन्य हो गए।
रामकथा में युगों- युगों तक अब इक नाम तुम्हारा होगा ।।
देवेन्द्र सिंह पर्जन्य – भगवान विष्णु का उपनाम




