जीवन में रचनात्मकता — राजेन्द्र परिहार सैनिक

जीवन अपना है,उस कैसे जीना है??
यह निर्णय भी हमें ही लेना है। जीवन में मनोरंजन और
खुशमिजाज बनाए रखना भी अपने हाथ में है। जीवन है तो जिम्मेदारियां भी हैं और हमें अपनी जिम्मेदारियों निभाते २ जीवन मे नीरसता का आ जाना स्वाभाविक भी है अतः अपने जीवन को सक्रिय और खुशहाल बनाए रखने के लिए जीवन में एन्टरमेंट भी उतना ही जरूरी है जितना कि सब्जियों में मसाले बिना स्वाद की कल्पना करना भी नादानी ही होगी। नया साल आरंभ हो चुका है अतः जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए दिनचर्या में नयापन लाना आवश्यक है, स्वभाव में सकारात्मक सोच का होना आवश्यक है। जीवन को नीरसता से बचाने के लिए कोई भी कला,शौक,को परवान चढ़ाना जरूरी है। चित्रकला,संगीत कला, साहित्य लेखन,पठन पाठन में अथवा कहीं पर्यटन स्थल पर,अथवा धार्मिक स्थल पर में जाकर अपने
समय का सदुपयोग भी कर सकते हैं और बोरियत से बचा जा सकता है। कल्पना कीजिए कि जीवन एक ड्राइंग पेपर है,और उसमें आपको एक खूबसूरत पेंटिंग बनानी है तो उस पेपर पर जितने खूबसूरत रंग भरेंगे पेन्टिंग उतनी ही शानदार बनकर उभर कर सामने आएगी, वैसे ही जीवन भी खुशहाल रंगों से सज संवर कर मुस्कुरा उठेगी और जीवन का नया ही आनन्द आपको मिलेगा। सबसे हिल मिल कर चलें। विचारों का आदान-प्रदान होना जीवन में नवसंचार उत्पन्न करता है। सबके दुःख में सुख में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।
राजेन्द्र परिहार सैनिक




