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विश्व हिंदी दिवस — डॉ सरिता चौहान

 

कितनी सुंदर सरल और सहज हैं
अपनी यह हिंदी भाषा
निज मन की भाषा
जन-जन की भाषा
हम सब की भाषा
यह हिंदी भाषा
घर परिवार की भाषा
खेत खलिहान की भाषा
कोल्हू के गीत की भाषा
मां के आटा पीसने वाली चक्की (जांता) की भाषा
आम के डाल पर बैठी
कोयल की भाषा
फूलों पर गूंजार करते हुए
भंवरों की भाषा
पतझड़ की भाषा
बसंत की भाषा
अनुहार की भाषा
मनुहार की भाषा
अनुनय विनय की भाषा
हास्य परिहास की भाषा
यही तो है अपनी हिंदी भाषा
मनको हर्षित करने वाली
दुख संताप को हरने वाली
क्या नहीं है इस भाषा में
जरा सोचिए तो सही
रस में डूबिये
छंदों में गाइए और
अलंकार से अपनी भाषा को सहेजिए
उपमा रूपक और अनुप्रास
मिटाते हैं सब हृदय त्रास
अ से लेकर ज्ञ तक जाती
अक्षर अक्षर ज्ञान करती
अज्ञानी को ज्ञानी बनती
आधे अक्षर और बिंदी का भी रखती ध्यान
ऋषि मुनियों का करती सम्मान
हस्व दीर्घ अल्पप्राण महाप्राण
सबका है इसमें स्थान
प्रत्येक मात्राओं का अनुपम संधान
अपनी हिंदी भाषा सबसे महान
ध्वनियों का सुंदर अनुक्रम
कंठ तालव्य मूर्धन्य ओष्ठय
ऊष्म दि्वणुण
पंचम वर्ण अनुस्वार जब इन ध्वनियों में लग जाए
इन सब का मान बढ़ाएं
इसीलिए समय के साथ चलिए
सब मिलकर साथ कदम बढ़ाइए
हिंदी भाषा को देश-विदेश और
व्यापार की भाषा बनाइए
रोजगार की भाषा बनाइए
पाई से पाई मिलाइए
जोड़िए—
हिंद हिंदुस्तान और हिंदी भाषा
वैश्विक पटल पर लहराइए
धरती से लेकर अंतरिक्ष तक
चंद्रयान से लेकर मंगलयान तक
गूंजता रहे—
हिंदी- हिंद और हिंदुस्तान ।
स्वरचित
डॉ सरिता चौहान
प्रवक्ता हिंदी
पीएम श्री ए डी राजकीय कन्या इंटर कॉलेज गोरखपुर ।

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