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मजदूर तबके को राम राज्य की आस — ललिता भोला जयपुर राजस्थान

 

ज्यादा दूर न जाते हुए आप रोड नंबर 14 पर सुबह-शाम काम पर आते – जाते हुए मजदूरों को , और काम मांगने वाले मजदूरों की अत्यधिक संख्या देख सकते हैं। रोज कमाने खाने वाले मजदूर भारी संख्या में आपको दिख जाएंगे ! इतनी भयावह सर्दी में जहाँ हम अलाव सेकते हुए मूंगफली ,गजक , गरम-गरम चाय की प्याली , का लुत्फ उठाते हुए सर्दियों का आनंद ले रहे होते हैं वहीं ये मजदूर वर्ग दो जून की रोटी के लिए जद्दोजहद करते हुए दिखाई पड़ते हैं! आज कितनों को काम मिलेगा??आज कितने घरों में चूल्हा जलेगा??ये सवाल एक बार फिर कचोट रहा है??
कल शाम कुछ बच्चों को पढ़ाते हुए राम कथा और पंडाल पर चर्चा हुई! बहुत ही भव्य कलश यात्रा निकाली गई थी! बड़े बड़े नेताओं और मंत्रियों का जमघट भी लगा रहता है वहांँ ! झांकियों से सुसज्जित अद्भुत छटा भी है! अभी वर्णन किया जा रहा था कि बीच में ही एक मजदूर का बच्चा जो पढ़ रहा था बोल उठा ” ललिता मैम वहांँ दोनों समय खाना भी मिल रहा है ऐसा मेरे पापा बता रहे थे ” !!
सुनकर अंतर्मन द्रवित हो उठा!! मजदूर वर्ग को उस कथा और पंडाल से कोई सरोकार नही है। सरोकार है तो अपने पेट की भूख और परिवार के भूख की !!
चलो कुछ दिन के लिए भोजन व्यवस्था रहेगी उनके लिए! ऐसी कथा समय समय पर हो और हमारे श्रद्धालुओं और धर्म की राह पर चल रहे नेक इंसान यहां आते रहें और हमारे मजदूर भाई – बहन को खाने के साथ यानी की रोटी ,कपड़ा ,मकान की व्यवस्था कैसे हो इस पर भी जरा विचार करते जाएं।
आशा है २०२६ में कुछ और अच्छा हो ! गरीब और मजदूर वर्ग के लिए ! तभी रामराज्य होगा ! सिर्फ 14 नं में नहीं वरन समूचे देश में राम राज्य हो!!

ललिता भोला जयपुर राजस्थान

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