साहित्य संगम मंच की मासिक काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन सम्पन्न

जयपुर। साहित्यिक सरोकारों को समर्पित साहित्य संगम मंच की मासिक काव्य गोष्ठी का भव्य एवं गरिमामय आयोजन जयपुर में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. देवीना ठकराल ‘देविका’ की विद्वतापूर्ण उपस्थिति रही, जबकि अध्यक्षता मंच की संस्थापिका शिखा खुराना ने की। कार्यक्रम का संयोजन अलका गर्ग ने कुशलतापूर्वक संभाला तथा प्रभावी संचालन सीमा पुरबा ‘सिम्मी’ द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीपा शर्मा ‘उजाला’ ने माँ सरस्वती वंदना से किया, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा।
काव्य पाठ की मुख्य झलकियाँ
गोष्ठी में विभिन्न रचनाकारों ने सामाजिक, पारिवारिक और समसामयिक विषयों पर अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दीं।
अनिता तिवारी ने माँ-बेटी के पावन संबंधों पर मार्मिक काव्य पाठ किया, वहीं राधा गोयल ने बेटी शिक्षा के महत्व पर ओजपूर्ण रचना सुनाई। अरुण ठाकर ‘ज़िंदगी’ ने समय की सच्चाई को शब्द देते हुए कहा—
“है हक़ीक़त वक्त यारों, अपना बन नसीब था,
कितने दिन गुज़ार आए, वक्त जो क़रीब था।”
कृत्यानंद झा ने सामाजिक यथार्थ का सजीव चित्र प्रस्तुत किया, जबकि अवधेश कुमार श्रीवास्तव ने माँ को समर्पित भावपूर्ण रचना से सभी को भावुक कर दिया—
“माँ के दूध से मीठी जग में, कोई नहीं मिठाई है,
छप्पन भोग हैं फीके सम्मुख, यह मीठी बड़ी दवाई है।”
मधु मंगल सिंह ने माता-पिता के वात्सल्य को हृदयस्पर्शी शब्दों में अभिव्यक्त किया। पूनम जायसवाल ने पिता के व्यक्तित्व का भावपूर्ण चित्रण किया—
“कभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान है पिता,
कभी धरती तो कभी आसमां है पिता।”
होली के रंगों से सजी प्रस्तुति ममता गुप्ता ने दी, जबकि संजय तिवारी ने चाँद के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं को स्वर प्रदान किया।
दीपा शर्मा ‘उजाला’ ने सशक्त व्यंग्य कविता से सामाजिक यथार्थ को मुखर किया। अलका गर्ग ने होली पर दिलकश ग़ज़ल प्रस्तुत करते हुए कहा—
“लगाना है अगर रंग तो, लगाना प्यार होली में,
भुला देना गिले शिकवे, हमारे यार होली में।”
संचालिका सीमा पुरबा ‘सिम्मी’ ने अपनी ओजस्वी शैली से कार्यक्रम को ऊर्जावान बनाए रखा और राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत रचना से समां बाँध दिया—
“देश मेरा सोने की चिड़िया, माटी इसकी कुंदन है,
सौ-सौ बार बलाएं लूँ मैं, बारंबार अभिनंदन है।”
अध्यक्षीय उद्बोधन में शिखा खुराना ने अपनी रचना “मेरा श्रृंगार” की भावपूर्ण प्रस्तुति दी।
मुख्य अतिथि डॉ. देवीना ठकराल ‘देविका’ ने सभी रचनाकारों को धैर्यपूर्वक सुनकर सारगर्भित समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने होली एवं नारी सम्मान को इंद्रधनुषी शब्दों में पिरोते हुए कहा—
“बिखेरकर इंद्रधनुषी रंग स्वर्ग-सी इस धरा पर,
रंग दें हर मन सद्गुणों से—अबकी बार होली पर।”
अंत में मुख्य अतिथि एवं सभी रचनाकारों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए मासिक काव्य गोष्ठी का सफल समापन हुआ। साहित्य संगम मंच परिवार ने सभी सहभागियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।




