देवरिया में साहित्यिक चौपाल का 103वाँ सोपान संपन्न: शब्दों की महक से महकी फिजा

अरविंद शर्मा जिला ब्यूरो चीफ नज़र इंडिया 24
देवरिया। साहित्य, संस्कृति और लोकभाषा भोजपुरी के संरक्षण को समर्पित संस्था डॉ. राम मनोहर लोहिया सेवा एवं अध्ययन केंद्र (भागलपुर) तथा अंतरराष्ट्रीय सचिवालय विश्व भोजपुरी सम्मेलन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘साहित्यिक चौपाल’ का 103वाँ आयोजन रविवार, 22 मार्च 2026 को जलकल रोड स्थित संस्था के शिविर कार्यालय में भव्यता के साथ संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कुशीनगर की पावन धरती से पधारे मुख्य अतिथि डॉ. सच्चिदानंद द्विवेदी ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी सम्मेलन के अध्यक्ष आदरणीय सुधाकर तिवारी एवं डॉ. दिवाकर तिवारी ने संयुक्त रूप से की। मंच पर विशिष्ट अतिथि के रूप में चौपाल के अध्यक्ष सरोज पांडेय और जगदीश उपाध्याय की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस पूरे भव्य आयोजन की सबसे खास बात रही आदरणीया क्षमा श्रीवास्तव का ओजस्वी और मखमली संचालन। उन्होंने अपनी कुशल संचालन कला और वाक्पटुता से न केवल कार्यक्रम की गति को जीवंत बनाए रखा, बल्कि अपनी चुटीली टिप्पणियों और मर्मस्पर्शी काव्य पंक्तियों के माध्यम से श्रोताओं को अंत तक मंत्रमुग्ध कर दिया। क्षमा श्रीवास्तव ने जिस संजीदगी और खूबसूरती से एक वक्ता से दूसरे वक्ता के बीच साहित्यिक सेतु का निर्माण किया, उसने गोष्ठी की गरिमा में चार चाँद लगा दिए। उनकी प्रभावी उपस्थिति और शब्दों के सटीक चयन ने पूरे मंच को एक नई ऊर्जा और सुव्यवस्थित दिशा प्रदान की, जिसकी प्रशंसा वहां उपस्थित सभी वरिष्ठ साहित्यकारों और अतिथियों ने मुक्त कंठ से की। उनकी वाणी ने इस 103वें पायदान को यादगार बना दिया।
कार्यक्रम का विधिवत आरंभ सच्चिदानंद ‘सवेरा’ की सुमधुर वाणी में प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद काव्य पाठ का सिलसिला शुरू हुआ, जिसमें विभिन्न कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को आनंदित किया। कवि दया शंकर कुशवाहा, इंद्र कुमार दीक्षित, नित्यानंद आनंद, लालता प्रसाद, माहिर विचित्र, डॉ. एस. एन. तिवारी और सौदागर सिंह ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समसामयिक विषयों और लोक विधाओं पर गंभीर विमर्श प्रस्तुत किया। वहीं नारी शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हुए कवयित्री पार्वती देवी, प्रार्थना राय, श्वेता राय, श्वेता पांडे, रंजीता श्रीवास्तव, प्रीति पांडे और नीरजा जी ने अपनी मर्मस्पर्शी कविताओं और गीतों से सभागार को भावुक और उत्साहित कर दिया।

चौपाल के अंत में डॉ. दिवाकर तिवारी ने सभी नवागत और वरिष्ठ रचनाकारों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 103वें पायदान तक पहुँचना संस्था की अटूट निष्ठा का प्रतीक है। कार्यक्रम के समापन पर जलकल कॉम्प्लेक्स का परिसर तालियों की गड़गड़ाहट और साहित्य के अनमोल मोतियों से सराबोर नजर आया। यह आयोजन देवरिया की साहित्यिक विरासत में एक और स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया, जो लंबे समय तक लोगों के मानस पटल पर अंकित रहेगा।




