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योगदान — अलका गर्ग” अक्श “ गुरुग्राम

 

सूर्य की सुनहरी किरणें हौले-हौले घर के भीतर उतर आई थीं। चारों ओर चिड़ियों की मधुर चहचहाहट गूँज रही थी और मंद समीर वातावरण को सजीव बना रहा था। किंतु रश्मि इन सब से अनभिज्ञ, अभी भी नींद की आगोश में खोई हुई थी।

तभी अचानक बाहर से आते हुए कोलाहल से उसकी तन्द्रा भंग हुई।लोगों की चीख पुकार एम्बुलेंस और पुलिस की गाड़ियों के सायरन की तेज आवाज़ सुनकर वह झटपट बिस्तर से उठी और देखने के लिए बालकनी की ओर भागी।उसका घर चौथी मंजिल पर था तो बाहर का नज़ारा साफ़ साफ़ दिखाई देता था।उसने नीचे झाँक कर देखा तो सन्न रह गई। शायद कोई दुर्घटना हुई थी।नीचे का कोहरा अभी पूरी तरह से नहीं छँटा था तो कुछ साफ़ नज़र नहीं आ रहा था सिर्फ़ आवाज़ें आ रही थी।
बहुत अफ़रातफ़री मची हुई थी।रश्मि की समझ में कुछ नहीं आया। वह शॉल उठाते हुए लिफ्ट की ओर भागी।यह सोच कर ही कि नीचे जा कर ही उसे सही स्थित का पता चलेगा।विवेक दफ्तर के काम से कुछ दिन के लिए बाहर गए हुए थे तो अकेली होने के करण उसे घबराहट भी हो रही थी।
घटनास्थल पर जा कर देखा कि धुंध के कारण एक के बाद एक कई वाहन आपस में टकरा गए हैं।कई गाड़ियाँ और बाइक स्कूटर ट्रक सभी धुंध में रफ़्तार में अचानक गतिरोध होने के कारण एक दूसरे से टकराते चले गए।
बड़ा ही भयावह दृश्य था। बहुत से घायल हुए और उसने सुना कि चार पाँच मौतें भी हुए हैं।
चारों तरफ़ सामान और रक्त फैला हुआ था।यह सब देख कर उसे बेहोशी सी छाने लगी।उन सभी के लिए मन ही मन प्रार्थना करते हुए अनमनी हो कर ऊपर जाने के लिए लिफ्ट की ओर मुड़ी तो देखा कि चार पाँच साल का एक बच्चा रोते रोते उसके पीछे आ रहा है।
रश्मि ने रुक कर पूछा कि तुम किसके साथ हो।तो उसने गाड़ियों के बीच बुरी तरह से फँसी हुई एक टूटी पिचकी बाइक की तरफ़ इशारा करके कहा माँ -बाबा…।
सुन कर रश्मि की रूह काँप गई।वह समझ गई कि ज़ोरदार धक्का लगने के कारण वह बच्चा उछल कर सड़क के किनारे जा गिरा और माँ बाप का हाल तो बाइक की हालत देख कर समझ में आ ही रहा था।
उसने उस बच्चे को उठा कर सीने में भींच लिया।बड़ी शांति और सुकून महसूस हुआ उसे।
फिर उसने घटनास्थल पर तैनात पुलिस कर्मियों को बच्चे के बारे में बताया।
इस भीषण हादसे में बच्चे के माँ बाप किस हाल में हैं ..हैं भी या नहीं…बच्चे को ढूँढने या खैर खबर लेने कोई आता है कि नहीं..यह गुत्थी सुलझने तक रश्मि ने पुलिस और प्रशासन से उस बच्चे को अपने पास रखनी की इजाज़त ले ली।
इस त्रासदी में मानवता के नाते उसका यह अपनी तरफ़ से एक छोटा सा योगदान था।

अलका गर्ग” अक्श “
गुरुग्राम

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