फॉलो /अनुसरण — सुनीता तिवारी”सरस”

मनुष्य स्वभाव से अनुकरणशील होता है।
वह अपने आसपास के लोगों, उनके विचारों और व्यवहार से प्रभावित होकर अक्सर उन्हें फॉलो करता है। बचपन से ही हम माता-पिता, गुरु और समाज के आदर्शों का अनुसरण करते हैं, जिससे हमारे व्यक्तित्व का निर्माण होता है। इसलिए यह आवश्यक है कि हम किसे और क्या फॉलो कर रहे हैं? इसका चुनाव सोच-समझकर करें।
आज के डिजिटल युग में फॉलो शब्द का दायरा और भी बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर लोग किसी व्यक्ति, विचार या ट्रेंड को बिना गहराई से समझे फॉलो करने लगते हैं। कभी-कभी यह अंधानुकरण हमें गलत दिशा में भी ले जा सकता है। इसलिए विवेकपूर्ण निर्णय लेना अत्यंत आवश्यक है।
सच्चा फॉलो वही है जो हमें बेहतर इंसान बनाए, हमारे भीतर सकारात्मकता, नैतिकता और संवेदनशीलता का विकास करे। हमें केवल दूसरों के पीछे चलने के बजाय, अपने भीतर की आवाज़ को भी सुनना चाहिए। जब हम सही मूल्यों और आदर्शों का अनुसरण करते हैं, तब हमारा जीवन सार्थक और प्रेरणादायक बनता है।
अतः फॉलो करना बुरा नहीं है, लेकिन सही का अनुसरण करना ही बुद्धिमानी है। साथ ही, हमें ऐसा जीवन जीना चाहिए कि लोग हमें फॉलो करने योग्य समझें।
सुनीता तिवारी”सरस”




