Uncategorized

माँ की महिमा पर आधारित कृति का भव्य लोकार्पण, साहित्यिक संगोष्ठी में गूंजे भावों के स्वर

 

नई दिल्ली। वरिष्ठ लेखिका कुसुम लता पुंडोरा ‘कुसुम’ की बहुप्रतीक्षित तीसरी पुस्तक “भूमंडल की अनुपम रचना- माँ” का भव्य लोकार्पण रविवार को निर्माण विहार, दिल्ली स्थित एस.एस.एस. स्टूडियो में अत्यंत हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन देवप्रभा प्रकाशन, गाजियाबाद के बैनर तले किया गया, जिसमें देशभर के साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर विश्व स्तरीय साहित्यकार डॉ. सविता चड्ढा के सान्निध्य में वरिष्ठ ग़ज़लकार श्री अनिल मीत, कवि-प्रकाशक डॉ. चेतन आनंद, सुप्रसिद्ध दोहाकार डॉ. मनोज कामदेव, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अशोक कुमार मयंक एवं प्रसिद्ध लेखिका कंचन वार्ष्णेय ‘कशिश’ ने संयुक्त रूप से पुस्तक का लोकार्पण किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन कवयित्री राजरानी भल्ला ने किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ रजनी बाला ‘सहज’ द्वारा गणेश वंदना एवं स्वयं लेखिका कुसुम लता ‘कुसुम’ द्वारा सरस्वती वंदना के साथ हुआ, जिससे वातावरण पूर्णतः भक्तिमय और साहित्यिक हो उठा।अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. सविता चड्ढा ने कहा कि लेखक के शब्द उसके अंतर्मन का आलोक होते हैं और उसकी आत्मा का रस बनकर पाठकों के हृदय को स्पर्श करते हैं। उन्होंने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि इसमें संकलित लेख और दोहे पाठकों को भावनाओं के सतरंगे संसार में ले जाते हैं तथा ‘माँ’ की महिमा को जीवंत कर देते हैं।

कार्यक्रम में लगभग 35 रचनाकारों ने अपनी काव्य प्रस्तुतियों से श्रोताओं को भावविभोर किया। मंचासीन एवं उपस्थित सभी साहित्यकारों का अंगवस्त्र, मोमेंटो एवं मुक्ताहार से सम्मान किया गया।काव्य पाठ में भाग लेने वाले प्रमुख रचनाकारों में एडवोकेट पवन मल्होत्रा, डॉ. संतोष संप्रीति, दिनेश आनंद, देवेंद्र शर्मा ‘देव’, बृज माहिर, गोल्डी ग़ज़ब, गुस्ताख़ हिंदुस्तानी, सुरेंद्र सिंह ‘सिफर’, पूनम तिवारी ‘नित्या’, डॉ. ममता झा ‘रुद्रांशी’, मधु शर्मा ‘मधुर’, रजनी बाला ‘सहज’, बबली वशिष्ठ, सुरेशचंद्र जोशी, डॉ. अमृता अमृत, श्यामा भारद्वाज ‘श्याम’, गुरमीत सिंह, सुधीर सिंह ‘सुधीर’, कर्मेश सिन्हा ‘तनहा’, डॉ. देवव्रत शर्मा ‘अयन’, रजनीश गोयल, दीपिका वल्दिया, सुरेश सेमवाल, हुमा देहलवी, नेहा जैन, दास प्रेम, मंजुला राय, रीना सेमवाल, सीमा गर्ग सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित रहे। पुस्तक भूमंडल की अनुपम रचना- माँ में माँ की महिमा, उसके विविध रूप, संतान के प्रति उसके कर्तव्य और संतान के दायित्वों का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया है। यह कृति वर्तमान सामाजिक परिप्रेक्ष्य में नैतिक मूल्यों और संस्कारों के संरक्षण का संदेश देते हुए पाठकों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती है। कार्यक्रम का समापन स्वादिष्ट भोजन एवं पुस्तक परिचर्चा के साथ हुआ, जहाँ साहित्यकारों ने आपसी संवाद के माध्यम से विचारों का आदान-प्रदान किया। यह आयोजन साहित्य प्रेमियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!