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डॉक्टर: स्वस्थ समाज के सच्चे शिल्पकार — डॉ. शुचिता नेगी ‘शुचि’ का डॉक्टर्स डे संदेश

आज जब भी मैं मेरे जीवन में पीछे मुड़कर देखती हूॅं तो मुझे अपने पूर्वज मेरे तीन दादा जी स्व.आ. डॉ बद्रीनाथ महोदय, डॉ जगन्नाथ महोदय, डॉ सुरेंद्रनाथ महोदय एवं मेरे दो आदरणीय स्व. ताऊजी डॉ.अशोक महोदय एवं डॉ. विक्रम महोदय तथा मेरे पिताजी डॉक्टर श्रीनाथ महोदय इनके द्वारा हमारे जीवन एवं समाज के प्रति जो कर्तव्य निष्ठता थी वह सबसे सुनकर और कुछ बचपन के सुनहरे पलों को याद करके मन ही मन प्रणम्य हो जाती हूॅं।
उनके कठिन परिश्रम से समाज को जो उन्होंने सहायता दी है कई रोगियों के रोग दूर किए हैं और कई घर उजड़ने से बचाए हैं। उनके इस कठिन कार्यशैली को मैं शत-शत नमन करती हूॅं। एक डॉक्टर समाज में रोगी के तन मन को ही नहीं अपितु उसके व्यवहार उसकी कार्यशैली और उसके जीवन को भी स्वस्थ बनाने का कार्य करता है। और जब आम मनुष्य का तन स्वस्थ होता है तो उसका मन और व्यवहार यह धीरे-धीरे स्वस्थ होने लगते हैं। इसलिए हमें सारे समाज के डॉक्टर्स को अनेक अनेक धन्यवाद देना चाहिए

— डाॅ. शुचिता नेगी “शुचि”

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