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वैदिक घड़ी- -डॉ. दक्षा जोशी’निर्झरा’ अहमदाबाद, गुजरात।

 

वैदिक घड़ी हमारी प्राचीन सनातन संस्कृति, विज्ञान और ब्रह्मांडीय सत्यों का एक अद्भुत संगम है। आधुनिक घड़ियों के अंकों के स्थान पर इसमें प्रकृति और जीवन दर्शन से जुड़े दिव्य नामों को स्थान दिया गया है, जो समय के हर प्रहर को आध्यात्मिक प्रतीकों से जोड़ते हैं:
1:00 बजे (ब्रह्म): संपूर्ण ब्रह्मांड के संचालक ‘ब्रह्म’ की एकात्मकता का प्रतीक।2:00 बजे (अश्विनौ): चिकित्सा और आयुर्वेद के देवता अश्विनी कुमार।3:00 बजे (त्रिगुणाः): प्रकृति के तीन गुण—सत्व, रजस और तमस।4:00 बजे (चतुर्वेदाः): सनातन धर्म के चार वेद।5:00 बजे (पञ्चप्राणाः): प्राण, अपान, समान, व्यान और उदान।6:00 बजे (षड्रसाः): जीवन और भोजन के छह रस।
7:00 बजे (सप्तर्षयः): मार्गदर्शन करने वाले सात महान ऋषि।8:00 बजे (अष्टसिद्धयः): योग साधना से प्राप्त आठ महासिद्धियाँ।9:00 बजे (नवद्रव्याणि): सृष्टि के नौ मौलिक द्रव्य।10:00 बजे (दशदिशः): दसों दिशाओं का बोध।11:00 बजे (रुद्राः): भगवान शिव के ग्यारह रुद्र स्वरूप।
12:00 बजे (आदित्याः): वर्ष भर ऊर्जा प्रदान करने वाले सूर्य के बारह आदित्य।यह अनूठी घड़ी केवल समय नहीं मापती, बल्कि हमें हमारी गौरवशाली विरासत और संस्कृति की याद दिलाती है। इसे पुनर्जीवित करना ही हमारी सच्ची पहचान है।

-डॉ. दक्षा जोशी’निर्झरा’
अहमदाबाद, गुजरात।

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