अंतरराष्ट्रीय स्थिति और भारत – विनोद कुमार शर्मा

स्वतंत्रता के बाद भारत को जटिल स्थितियों का सामना करना पड़ा अनेकानेक समस्याएं खाद्य संसाधनों की कमी अमेरिका से लाल गेहूँ जो वहां जानवरों के खिलाने के काम आता से देश ने गुजारा किया आज आत्मनिर्भर ही नहीं निर्यातक हैं श्वेत क्रांति डॉ वर्गीस कुरियन का योगदान मेट्रो मैन ई श्रीधरन का यातायात में उल्लेखनीय योगदान मिसाइल मैन डॉ अब्दुल कलाम जी का योगदान से देश मजबूत हुआ हालांकि अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में आयरन लेडी इंदिरा गांधी जी का गुटनिरपेक्ष आंदोलन का सफल योगदान दो ध्रुवीय विश्व को संतुलित करता रहा
आज तेल पर निर्भर विश्व की अर्थव्यवस्था चरमरा गई जिसका विकल्प तलाशना आवश्यक है उन परिस्थितियों में जब UNO की भूमिका नगण्य होती जा रही है USA का टैरिफ हो या तेल उत्पादक देशों पर नियंत्रण की कोशिश हो या रूस से व्यापार बंद करने की धमकियों को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता USA द्वारा भारतीयों पर लगे ढेरों प्रतिबंध हों या सैकड़ों भारतीयों को बेड़ियों में जकड़कर मालवाहक प्लेन से डिपोर्ट करना कब तक सहेंगे चुप रहेंगे
BRICS ब्रिक्स देशों को मजबूत बनकर आपसी सहयोग से तेल संकट व्यापार यूरोप की तर्ज पर सामूहिक करेंसी बनाकर मजबूत बनना ही आज मुख्य चुनौती है जिसे स्वीकार कर USA पर निर्भर नहीं रहना चाहिए जब हम कोरोना जैसी परिस्थितियों महामारी का सामना कर सकते तो प्रतिबंधों टैरिफ की धमकियों में न आकर कैनेडा चाइना जैसा माकूल जवाब दे सकते युद्धों को रोकने में प्रमुख भूमिका निभाने को सकारात्मक दृष्टिकोण से प्रयास कर सकते ब्रिक्स का लाभ उठाना बहुत ही महत्वपूर्ण कदम होना चाहिए।
विनोद कुमार शर्मा




