महादेवी वर्मा विश्व भूषण सम्मान से अलंकृत हुईं कवयित्री शिखा खुराना ‘कुमुदिनी’

नई दिल्ली। साहित्य के क्षेत्र में निरंतर सृजन, संवेदनशील लेखनी और साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय योगदान के लिए नई दिल्ली की सुप्रसिद्ध कवयित्री एवं साहित्यकार शिखा खुराना ‘कुमुदिनी’ को निहारिका साहित्यिक मंच, कंट्री ऑफ इंडिया फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा प्रतिष्ठित ‘महादेवी वर्मा विश्व भूषण सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
निहारिका साहित्यिक मंच के चतुर्थ वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित यह भव्य सम्मान समारोह साहित्य, समाजसेवा, स्वास्थ्य सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्ट व्यक्तित्वों की गरिमामयी उपस्थिति का साक्षी बना। मंच की संस्थापिका रीमा सिन्हा जी तथा अध्यक्ष अब्दुल अज़ीज़ सिद्दीकी जी के कुशल आयोजन और अथक प्रयासों से यह समारोह अत्यंत सुव्यवस्थित एवं यादगार रहा। देश-विदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए सम्मानित व्यक्तियों की सहभागिता ने आयोजन को वैश्विक स्वरूप प्रदान किया।महादेवी वर्मा जी जैसी महान साहित्यकार के नाम से जुड़ा सम्मान प्राप्त होना शिखा खुराना ‘कुमुदिनी’ के लिए विशेष गौरव का विषय है। यह सम्मान उनकी साहित्यिक साधना, निरंतर लेखन और साहित्य के प्रति समर्पण को मिली एक महत्वपूर्ण पहचान है।

शिखा खुराना ‘कुमुदिनी’ ने मात्र सृजन तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि साहित्य को समाज से जोड़ने की दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। वे ‘साहित्य संगम मंच’ की संस्थापिका एवं ई-पत्रिका ‘संगमिका’ की संपादक हैं। 28 अप्रैल 2025 को स्थापित इस मंच के माध्यम से वे साहित्यकारों को रचनात्मक अभिव्यक्ति, प्रतियोगिताओं, काव्य गोष्ठियों, कार्यशालाओं तथा विभिन्न साहित्यिक आयोजनों के अवसर उपलब्ध करा रही हैं। मंच का मूल भाव ‘अपने दिल की लिखो’ साहित्यकारों को स्वतंत्र एवं भावपूर्ण अभिव्यक्ति के लिए प्रेरित करता है।

उनकी साहित्यिक यात्रा बहुआयामी रही है। वे 18 से अधिक पुस्तकों में अपनी रचनात्मक उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं, जिनमें उनकी एकल कृतियों के साथ अनेक साझा काव्य-संकलन भी शामिल हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘जीवन आनंद’, ‘रंग-ए-ख़्याल—लफ़्ज़ों का मज़मा’, ‘Ink of Tears’, ‘Season of Soul’ और ‘गुनगुनी धूप’ उल्लेखनीय हैं। इसके अतिरिक्त वे अटल काव्यांजलि 2024, दिल-दर्द-दरिया, अपराजिता, हंसगुल्ले, अबीर की महक, मां तुझे सलाम, वीणा के स्वर तथा दिल्ली दर्शन जैसी साहित्यिक कृतियों से भी जुड़ी रही हैं।
उनकी साहित्यिक एवं सामाजिक सक्रियता को विभिन्न प्रतिष्ठित सम्मानों से भी मान्यता मिली है। उन्हें कवि पद्माकर सम्मान, काव्य शिल्पी सम्मान तथा काव्य कौस्तुभ सम्मान सहित अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उनकी साहित्यिक यात्रा में लगभग 1500 सम्मान-पत्रों का संकलन भी उनके निरंतर सक्रिय सृजन और साहित्यिक सहभागिता का प्रमाण है।
कविता और लेखन के साथ-साथ संगीत से भी उनका आत्मीय जुड़ाव है। उनके लेखन और गायन को डिजिटल माध्यम पर भी पाठकों एवं श्रोताओं का स्नेह प्राप्त होता रहा है। उनके लिए साहित्य केवल शब्दों की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि भावनाओं, संवेदनाओं और जीवनानुभवों को समाज तक पहुँचाने का माध्यम है।
केंद्रीय सरकार में प्रथम श्रेणी राजपत्रित अधिकारी के रूप में दीर्घ सेवाकाल के बाद सेवानिवृत्त हुईं शिखा खुराना ‘कुमुदिनी’ ने अपने जीवन के अनुभवों को साहित्यिक सृजन में रूपांतरित किया। विधि एवं पेट्रोलियम मंत्रालयों में अपनी सेवाएँ देने के साथ-साथ उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।
‘महादेवी वर्मा विश्व भूषण सम्मान’ उनके लिए केवल एक सम्मान-पत्र या अलंकरण नहीं, बल्कि उस साहित्यिक साधना की स्वीकृति है जिसे उन्होंने किशोरावस्था से ही अपने भीतर संजोया और निरंतर लेखन, संपादन, मंच-संचालन तथा साहित्यिक सेवा के माध्यम से विस्तार दिया।
महादेवी वर्मा जी के नाम से प्राप्त यह सम्मान उनकी साहित्यिक यात्रा में एक और गौरवपूर्ण अध्याय जोड़ता है। यह उपलब्धि न केवल शिखा खुराना ‘कुमुदिनी’ के लिए बल्कि नई दिल्ली के साहित्यिक जगत और ‘साहित्य संगम मंच’ के लिए भी हर्ष एवं गर्व का विषय है।
शब्दों की साधना निरंतर चलती रहे, संवेदनाओं की यह यात्रा यूँ ही साहित्य के आकाश को आलोकित करती रहे, इसी शुभकामना के साथ शिखा खुराना ‘कुमुदिनी’ को इस विशिष्ट सम्मान के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।




