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सृजन की चोरी लाख करें भाव संग हुनर की करें कैसे कोई  — मीनाक्षी सुकुमारन

 

कहते हैं न कोई लाख कोशिश करे आपका नसीब नहीं छुरा सकता जो आपकी तकदीर में लिखा है वो आपको मिलेगा ही। आपका सपना, विचार भले ही कोई चुरा ले पर कोई आपकी लग्न, मेहनत, हुनर को नहीं चुरा सकता। ठीक उसी तरह
आपकी लेखनी,सृजन की चोरी कोई लाख कर ले,पर आपके एहसास,भाव और उनको अपने शब्दों में डालने का हुनर कोई कैसे ही चुरा पाएगा लाख यत्न कर ले वो असंभव है क्योंकि वो आपके अपने अंतर्मन के एहसास हैं जो भाव बन शब्दों में सिमटते हैं उनकी चोरी कोई नहीं कर सकता। आपका लिखा हुआ भले ही कोई कॉपी पेस्ट कर के अपने नाम से कहीं भी छपवाए या पोस्ट करे वो सिर्फ आपकी लेखनी , आपका लिखा हुआ चुरा रहा है आपकी सोच, आपके भाव नहीं चुरा सकता वो सिर्फ आपकी निजी संपत्ति है जिस पर सिर्फ आप का मौलिक अधिकार है। तभी तो कहते हैं “सृजन की चोरी लाख करें, भाव संग हुनर की करे कैसे कोई”। और ये खुशी चोर की ज़्यादा लंबी नहीं होती। क्योंकि जब उसे सराहना या वाहवाही मिलती है भले दूसरे को न पता हो की ये चोरी की रचना है उस व्यक्ति को तो पता होता ही है तो चाहकर भी वो उस तरह खुश नहीं हो पाता जैसा मौलिक रचना का सृजन करने वाला होता है जब लोग उसकी रचनाओं को सराहते हैं। इसलिए जैसे ओरिजनल , ओरिजनल ही होता है और फोटोकॉपी, फोटोकॉपी। तो निश्चिंत रहें की आपकी लेखनी , शब्द भले ही कोई भी चुरा ले पर आपकी अंतर्मन की आवाज़, एहसास, भाव कोई कभी भी नहीं चुरा पाएगा। और एक न एक दिन देर सवेर चोर की चोरी और हेराफेरी पकड़ी ही जाती है फिर शर्मिंदगी के अलावा कुछ हाथ नहीं लगता।
मीनाक्षी सुकुमारन
नोएडा

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