आजाद महफिल के मंच पर 77वें गणतंत्र दिवस की काव्यमय व संगीतमय अनुगूंज

सुनीता त्रिपाठी अजय। नजर इंडिया 24
77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर आजाद महफिल के तत्वावधान में गूगल मीट के माध्यम से एक भव्य काव्यात्मक आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर काव्य, ग़ज़ल, देशभक्ति कविताएँ एवं फिल्मी गीतों की रसधारा प्रवाहित हुई, जिसने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार रमाशंकर भारती रहे। कार्यक्रम का सशक्त व भावपूर्ण संचालन रविन ने किया तथा अध्यक्षता आदरणीया कुन्ती हरिराम ने की। मंच की संस्थापिका आशा हलधर रहीं। कार्यक्रम का शुभारंभ शकुन्तला सरूपरिया द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ, जिसे उन्होंने अत्यंत मधुर एवं प्रभावशाली स्वर में प्रस्तुत किया। सुनिता त्रिपाठी ‘अजय’ ने “प्यारो लागे रे महाने नखरालो राजस्थान” की प्रस्तुति देकर राजस्थान की शौर्य, वीरता और सांस्कृतिक गौरव का सजीव चित्रण किया। अनिल ने “ऐ मेरे प्यारे वतन” को भावुक अंदाज़ में प्रस्तुत कर देशभक्ति का ज्वार जगा दिया। शशी की प्रस्तुति “ऐ मेरे प्यारे वतन” ने श्रोताओं की आँखें नम कर दीं। कनक ने गुजराती गीत “अखियन से बात करे, देखत ही घात करे” को बेहद मधुर अंदाज़ में प्रस्तुत किया। शकुन्तला सरूपरिया ने “नित खैर मांगा” और “तेरे प्यार का रंग जो महका मेरी रूह में” जैसी रचनाओं से भावनात्मक गहराई को छुआ। सत्यार्थी की पंक्तियाँ—“साँस लेने को सर उठाता हूँ, तुमको बाग़ी सा नज़र आता हूँ… मैं गुलाब बनना चाहता हूँ”—कार्यक्रम की अत्यंत प्रभावशाली प्रस्तुति रहीं। इतिहास पर आधारित रचना “इतिहास लिखा के” का पाठ भेगों ने अभिनयात्मक शैली में किया, जिसे खूब सराहा गया। आशा हलधर ने “तेरे बनके रहेंगे ओ मोहना” से श्रोताओं को भावलोक में पहुँचा दिया। रूकसाना ने “जब कभी आमने सामने”, “वतन मेरा है हिंदुस्तान” और “तू ही मेरी आबरू” जैसी रचनाओं से देशप्रेम की भावना को प्रबल किया। मयूरी की प्रस्तुति “ये रातें ये मौसम, नदी का किनारा” ने कार्यक्रम में मधुरता घोल दी।
संचालक रविन ने स्वयं “ऐ किसकी महफ़िल है, क्या फ़साना है” तथा “उठ आँख खोल आज वही दिन है” जैसी सुंदर ग़ज़लों और शेरों का पाठ किया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में अध्यक्ष कुन्ती हरिराम द्वारा उनकी तीनों पुस्तकों पर सारगर्भित चर्चा की गई। समापन “तुम्हें याद करते-करते” की भावपूर्ण प्रस्तुति के साथ अत्यंत गरिमामय एवं सुंदर वातावरण में हुआ। यह काव्य संध्या साहित्य, संस्कृति और देशभक्ति का अनुपम संगम सिद्ध हुई।
सुनिता त्रिपाठी’अजय जयपुर राजस्थान




