सुंदर संदेश विचार प्रक्रिया —डा0 मीरा कनौजिया काव्यांशी

मानव मन चैतन्यता लिए हुए विवेक विचार निरंतर निर्वहन करते हुए, चेतन मन में संजोता।
मानव जीवन सत्कर्मों का श्रेष्ठ परिणाम होता है, जीवन को अच्छे कार्यों में एवं सदविचारों में, सद व्यवहार में, निर्वाह करना चाहिए।
मानव जीवन एक बार प्राप्त हुआ है श्रेष्ठ कर्मों का सुंदर परिणाम है, क्यों ना उसका हमेशा सदुपयोग किया जाए। सार्थक करते अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त , इंद्रियनियंत्रण में रहना और मानवता से ओतप्रोत कार्य प्रणाली को अपने जीवन में व्यहवृत करना अति अनिवार्य है।
सर्व धर्म समभाव की भावना का विकास एवं देश का विकास ,जाति धर्म संप्रदाय की भावना से परे, एकता के सूत्र में हमेशा परस्पर विचारों का आदान-प्रदान एवं सामाजिक जीवन व्यवहार में अपनाना चाहिए।
समता, समानता, करुणा व्यवहार सौहार्द, सरलता ,सहजता मानव ही मानव के लिए परस्पर एक दूसरे के सुख-दुख में काम आना ही नैतिकता और चरित्र उत्थान कहलाता है। सत्य सर्वोपरि होता है। असत्य का परित्याग हमेशा करना चाहिए सत्य की छवि प्राणों से भी बढ़कर होती है। गरीबों दीन हीन असहाय की मदद करनी चाहिए। समस्त जीवों पर दया करनी चाहिए। प्रकृति का संरक्षण चाहिए पौधारोपण एवं पर्यावरण परिवेश को हमेशा शुद्ध, प्रदूषण रहित बनाना चाहिए।
शिष्टाचार, अनुशासन, मानवता,सौहार्द करुणा से भरे हुए शब्दों को प्रयोग करते हुए एक दूसरे के साथ मानवता का व्यवहार आचरण ही जीवन में आत्मसात करके जीवन वृत का पालन करना चाहिए। अति सुंदर सौहार्द मानवीयता युक्त विचार अभिव्यक्ति, एवं सुंदर संदेश आचरण आत्मसात हेतु —–डा0 मीरा कनौजियाकाव्यांशी




