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केमिकल रंगों से दूरी बनाकर मनाएं सुरक्षित और स्वस्थ होली= सुमित्रा झा

 

सजगता के साथ मनाएं होली पर्व

यह पर्व बने सभी के लिए सुखद, सुरक्षित और यादगार

समालखा । लोकेश झा होली भारतीय संस्कृति का एक जीवंत और उल्लासपूर्ण पर्व है, जो आपसी प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का प्रतीक है। यह त्योहार हमें बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देता है। भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद की अटूट श्रद्धा और होलिका के अंत की कथा हमें सिखाती है कि सत्य और आस्था की हमेशा जीत होती है। यही संदेश होली के रंगों में समाया हुआ है। मन की बात कार्यक्रम की महिला मोर्चा के जिला सह संयोजक सुमित्रा झा ने जिलेवासियों को होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व केवल रंगों का नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने का अवसर है। उन्होंने सभी पूर्वांचल वासियो से अपील की कि होली को पारंपरिक, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाएं। विशेष रूप से उन्होंने केमिकल युक्त रंगों और गुलाल से बचने का आह्वान किया, क्योंकि ये रंग त्वचा, आंखों और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
सुमित्रा झा ने कही कि प्राकृतिक रंगों और फूलों से बनी होली न केवल स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है। हमें अपने बच्चों और युवाओं को भी जागरूक करना चाहिए कि वे हानिकारक रंगों का प्रयोग न करें। साथ ही पानी की अनावश्यक बर्बादी से बचें और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
सुमित्रा झा ने कही कि होली सामाजिक समरसता को मजबूत करने का पर्व है। इस अवसर पर सभी मतभेद भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाएं और प्रेम, शांति व सद्भाव का संदेश फैलाएं। प्रशासन की ओर से भी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं ताकि जिले में होली का त्योहार शांति और सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाया जा सके।

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