साहित्य संगम मंच – नारी दिवस विशेष आनलाईन काव्य गोष्ठी सम्पन्न।

साहित्य संगम मंच द्वारा नारी दिवस विशेष काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन दिनांक 07 मार्च 2026 को सांय 4:00 बजे किया गया। इस विशेष आनलाईन आयोजन में देश की प्रतिष्ठित साहित्यकारा आदरणीया रश्मि शरद जी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया।
आदरणीया रश्मि शरद जी का वर्तमान निवास लखनऊ में है, जबकि उनका मूल निवास हरदोई (उत्तर प्रदेश) है। उन्होंने इंस्ट्रूमेंटेशन एवं कंट्रोल इंजीनियरिंग, झांसी से अध्ययन किया है तथा हिन्दी और समाजशास्त्र में परास्नातक की उपाधि भी प्राप्त की है। हिन्दी और अंग्रेज़ी के साथ-साथ रशियन भाषा का ज्ञान भी उनकी विद्वत्ता को एक विशिष्ट आयाम प्रदान करता है।
आप भूतपूर्व शिक्षिका रही हैं और शिक्षा के साथ-साथ साहित्य के क्षेत्र में भी निरंतर सक्रिय हैं। आप “लेखनी: रचना का संसार” नामक साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था की संस्थापिका हैं, जिसके माध्यम से साहित्य और समाज दोनों के लिए सराहनीय कार्य कर रही हैं। आपकी रचनात्मकता गीत, ग़ज़ल, छंद और मुक्त छंद जैसी विविध विधाओं में समान रूप से प्रवाहित होती है। आपकी रचनाएँ कई साझा संकलनों में प्रकाशित हो चुकी हैं तथा आप उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की सक्रिय कार्यकारिणी सदस्य भी हैं।
आपकी काव्य प्रतिभा का प्रसार केवल साहित्यिक मंचों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि दूरदर्शन पर भी आपकी काव्य प्रस्तुति प्रसारित हो चुकी है। साहित्य साधना के लिए आपको सृजन सम्मान, भिक्षुक सम्मान, निहारिका संस्था सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
ऐसी प्रेरणादायी, विदुषी और संवेदनशील साहित्यकार का मंच पर उपस्थित होना हम सभी के लिए अत्यंत गर्व और सौभाग्य का विषय रहा।
साहित्य संगम मंच की संस्थापिका शिखा खुराना ने पूरे मंच की ओर से आदरणीया रश्मि शरद जी का हार्दिक स्वागत, अभिनंदन और वंदन किया।
इस गोष्ठी का अद्भुत संचालन अलका गर्ग जी ने किया तथा सुनीला नारंग जी ने अत्यंत कुशलता से संयोजन की भूमिका निभाई।

सभी रचनाकारों ने नारी शक्ति, संवेदना और आत्मबल को केंद्र में रखकर अपनी

सशक्त प्रस्तुतियाँ दीं।
गोष्ठी में प्रस्तुत कुछ प्रभावशाली पंक्तियाँ—
गायत्री अशोक सावलानी
नारी चाय की तरह कड़क है,
पक-पक कर स्वादिष्ट हो गई,
जिंदगी जीने में माहिर हो गई।
सीमा पुरबा ‘सिम्मी’
नारी तू नारायणी एक दिन,
सतयुग जरूर लाएगी,
तेरी विजय गाथा को फिर,
यह दुनिया दोहराएगी।
अंजू मल्लिक
नारी तू नारायणी है,
फिर अबला क्यों कहलाती है।
दीपा शर्मा
अगले जन्म में कृष्ण बनूँगी,
तुम राधा बनना।
राजेन्द्र परिहार
सृष्टि का सौंदर्य,ममत्व और वात्सल्य भरा उपहार नारी।
मां,पत्नी,बहन,नानी,दादी रूप में अनूठा श्रृंगार है नारी।
मधु मंगल सिंह मधु
तुं दुर्गा, तुं लक्ष्मी सीता
सावित्री तुं पुण्य पुनीता।
तुं मीरा, तुं श्याम प्रिया,
राधा रानी सत्य सुनीता।
सुनीला नारंग
सुंदर स्वप्न सलोनी सक्षम
ईश्वर की इक रचना प्यारी
शिखा खुराना
हूँ भी नहीं और समझती भी नहीं हूँ,
खुद को कभी दिखती भी नहीं हूँ।
अलका गर्ग
कामिनी नहीं मैं सिर्फ़,
जन्मदात्री भी हूँ…
मुख्य अतिथि रश्मि शरद जी ने सभी रचनाकारों की प्रस्तुतियों को ध्यानपूर्वक सुनते हुए अत्यंत सारगर्भित और प्रेरणादायी समीक्षाएँ दीं तथा सभी को निरंतर लेखन के लिए प्रोत्साहित किया। अंत में उन्होंने अपनी सशक्त ग़ज़ल और मधुर संदेशात्मक गीत
सुनो कली! पड़ न जाना कहीं अलि के प्यार में,
वो तो भंवरा है,उसे हर डाल जाना है…
के माध्यम से काव्य पाठ का सुंदर समापन किया।
अंत में संचालिका द्वारा मुख्य अतिथि का हृदय से धन्यवाद प्रेषित करते हुए सभी रचनाकारों एवं श्रोताओं को नारी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ दी गईं और इसी के साथ यह गरिमामयी काव्य गोष्ठी सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
✨ रिपोर्ट:
शिखा खुराना
संस्थापिका – साहित्य संगम मंच




