संस्मरण लेख: “रंगोत्सव-संबंधों का पर्व” — श्री पालजीभाई वी राठोड ‘प्रेम’ (सुरेंद्रनगर-गुजरात)

होली का दिन आते ही वातावरण में एक नई उमंग छा जाती है।पेड़ पर नई कोंपलें हवा में मस्ती और लोगों के चेहरे पर हंसी खुशियां छा जाती है। सब एक दूसरे को मिलकर जैसे जीवन में रंग भर देते हैं। जब मैं छोटा था मुझे याद है सारे मोहल्ले वाले इकट्ठा होकर मिठाइयां खाते थे। मां रसोई बनाती थी। हम दोस्तों के साथ आंगन में पिचकारियां भर कर एक दूसरे पर रंग डालते थे। मेरी छोटी बहन गुब्बारे में रंग भरकर सबके ऊपर गुब्बारे फेंकती थी।गुब्बारे जब फूट जाते थे तब वह जोर-जोर से हंसने लगती थी। ऐसा उमंग मस्ती का दिन
रंगोत्सव था। होली का हुड़दंग मचा हुआ था।
हमारे मोहल्ले में बच्चों की वजह से झगड़ा हो गया। झगड़ने वाले दोनों हमारे पड़ोसी थे। बच्चों की वजह से झगड़ा इतना बढ़ गया कि एक दूसरे मारपीट पर उतर आ गए। इसी वजह से इन दोनों पड़ोसियों में मन मटाव हुआ। मेरे पिताजी बहुत समझदार थे। वो देखकर बहुत चिंतित होते थे। होली आने की तैयारी में थी। मोहल्ले में मेरे पिताजी ने सब को एकत्रित किया और समझाया।जीवन में हमें कुछ साथ ले जाना नहीं है। सब मिलझुल कर रहो। इसी में हमारी खुशी है। त्योहार के दिन हमें एक दूसरे का वेर भाव भूलना है। हमें सभी त्योहारों का सम्मान करना चाहिए।त्यौहार हमें प्रेम मोहब्बत सौहार्द सीखाता है ना कि वेर भाव रखना। एक दूसरे की खुशी का भी ख्याल रखना चाहिए।होली के दिन दिवाली की तरह रूठे संबंधों को मनाया जाता है।यही रंग एक बहाना बनाकर समाज में जागरूकता पैदा करता है। एक दूसरे साथ में होली खेलता है वहां मन मटाव नहीं रहता। संबंधो से रंगोत्सव है रिश्ते नाते में रंग लाया जाता हैं।वो रंगोत्सव बन जाता है। यही संबंध हमारे जीवन में बहुत सुकून देते हैं। दर्द पर मरहम का कार्य करते हैं। इसीलिए हम रंगोत्सव को संबंधों का पर्व कहते हैं।आपसी स्नेह प्रेम सम्मान भावनात्मक जुडाव महसूस करते हैं। रंगोत्सव ऐसा महापर्व है जो अनेक बुराइयों का अंत कर देता है। होली के दिन लोगों में खुशियों की लहर दौड़ जाती है। मेरे पिताजी की समझ भरी बात सुनकर दोनो परिवार सभी मोहल्ले के लोगों ने साथ में रंगोत्सव मनाया। तब मैं छोटा था पर आज भी मेरे मानस पटल पर ये अमिट छाप छोड़ गए हैं। मेरे जीवन में वह यादगार बन गए हैं।रंगोत्सव आते ही मुझे संस्मरण होने लगता है।
श्री पालजीभाई वी राठोड ‘प्रेम’
(सुरेंद्रनगर-गुजरात)




