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चोर-चोर मौसेरे भाई – कविता साव पश्चिम बंगाल

 

लोकतंत्र का सबसे बड़ा चमत्कार यह है कि यहाँ हर कोई खुद को चौकीदार बताता है और दूसरे को चोर। जनता हर चुनाव में यही सोचती है कि इस बार चौकीदार बदलेगा तो ताला सुरक्षित रहेगा। मगर चुनाव बीतते ही पता चलता है कि ताले का रंग बदला है, चाबी का मालिक नहीं।

आजकल राजनीति में “चोर-चोर मौसेरे भाई” केवल कहावत नहीं, बल्कि एक जीवंत दृश्य बन चुकी है। सत्ता पक्ष विपक्ष पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाता है, विपक्ष सत्ता पक्ष पर। प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक-दूसरे की फाइलें खुलती हैं, लेकिन अदालतों में अक्सर फाइलों पर धूल ही जमती रहती है। जनता सोचती है कि यदि दोनों के पास एक-दूसरे के इतने प्रमाण हैं, तो जेलें खाली क्यों हैं?

राम मंदिर आस्था का विषय है। करोड़ों लोगों की श्रद्धा उससे जुड़ी है। किंतु जब आस्था भी राजनीतिक मंच का स्थायी चुनावी पोस्टर बन जाए, तब प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि मंदिर भगवान का अधिक है या नेताओं के भाषणों का? राम के नाम पर जयघोष जितना ऊँचा होता है, उतनी ही धीमी आवाज़ में जनता रोज़गार, शिक्षा और महँगाई के प्रश्न पूछती रह जाती है।

चौकीदार का पद बड़ा पवित्र माना जाता है। उसका काम चौकसी करना है, घोषणा करना नहीं। पर आज का चौकीदार पहले कैमरे की ओर देखता है, फिर ताले की ओर। चोरी हो जाए तो बयान आता है—”जाँच होगी।” जाँच पूरी हो जाए तो बयान आता है—”कार्रवाई होगी।” और कार्रवाई की प्रतीक्षा में अगला चुनाव आ जाता है।

राजनीति का यह भी कमाल है कि सत्ता बदलते ही कल का चोर आज का सहयोगी बन जाता है और कल का सहयोगी आज का सबसे बड़ा चोर घोषित कर दिया जाता है। जनता आश्चर्य करती है कि यदि कल तक वह ईमानदार था तो आज बेईमान कैसे हो गया, और यदि आज बेईमान है तो कल ईमानदार किस आधार पर था?

रामायण में श्रीराम ने राज्य को मर्यादा का पाठ पढ़ाया था। आज राजनीति ने मर्यादा को नारे में बदल दिया है। राम का नाम सबकी जुबान पर है, पर राम के आदर्श कम ही दिखाई देते हैं। शायद इसलिए जनता कभी-कभी मुस्कुराकर कह उठती है—”यहाँ चोर कौन है और चौकीदार कौन, समझना कठिन है; कहीं ऐसा तो नहीं कि चोर-चोर मौसेरे भाई हैं?”

लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता है। यदि जनता प्रश्न पूछना बंद कर दे, तो चौकीदार भी निश्चिंत हो जाता है और चोर भी। इसलिए ज़रूरत केवल चौकीदार बदलने की नहीं, बल्कि चौकन्नी जनता की है। क्योंकि जब जनता जागती है, तभी लोकतंत्र सचमुच जागता है।
कविता साव
पश्चिम बंगाल

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