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मन का बोझ – राजेन्द्र परिहार”सैनिक “

 

राजेश एक सुसंस्कारित परिवार से सम्बद्ध सुशिक्षित और संस्कारी युवक था एवं धर्म-कर्म में विश्वास रखने वाला धार्मिक प्रवृत्ति का सुलझा हुआ नवयुवक था। एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में अच्छे ओहदे पर कार्यरत था। परिवार में पत्नी रमा और एक प्यारी गुड़िया बिटिया। सब सुख सुविधाओं से संपन्न एक खुशहाल परिवार था।

कहते हैं कि घटना दुर्घटना कभी कहकर नहीं आती है राजेश अपनी कार से रोजाना की भांति ऑफिस जा रहा था। हालांकि वो गाड़ी बहुत ही सावधानी से चलाता था और ट्रेफिक नियमों का पूर्ण पालन करता था। किंतु होनी को कौन टाल सकता है,हादसा होना था और हो गया। अचानक एक दस बारह साल का बच्चा उसकी कार के एकदम सामने आ गया। अचानक उसे देखकर राजेश अपना मानसिक संतुलन खो बैठा और कार की टक्कर से वो बच्चा दूर जाकर गिरा। चोट बहुत गहरी
लगी थी शायद!.. यह सोचकर राजेश घबरा गया। पुलिस केस कॉर्ट और जेल की सजा की कल्पना से ही रूह कांप उठी। सड़क सुनसान थी दूर दूर तक कोई दिखाई नहीं दिया। बच्चा बेहोश पड़ा हुआ था, उसने सोचा कि शायद मर गया है। राजेश का दिमाग एकदम सुन्न पड़ गया। दिमाग़ में एक ही बात आई कि भागने में ही भलाई है। उसने कार स्टार्ट की और ऑफिस चला गया किन्तु बार बार वही दृश्य सामने आ रहा था और
कुछ सूझ ही नहीं रहा था। सोच रहा था कि मैं तो बच गया पर वो बच्चा जीवित है कि मर गया है..?? किसी ने उसे संभाला होगा कि नहीं..?? पता नहीं उसके माता-पिता पर क्या बीत रही होगी..?? यदि किसी ने मुझे देखा होगा कि नहीं,,हो सकता है, किसी ने कार का नंबर नोट किया हो..?? तमाम तरह के सवाल उसके दिमाग में घूम रहे थे।शाम को घर आया देखकर
पत्नी ने कहा क्या बात है जी,,,आप गुमसुम उदास लग रहे हैं!ऑफिस में कोई बात हुई क्या..?? नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं है,बस काम ज्यादा होने से मन अनमना हों गया। खैर खाना खाकर सोने चला गया किन्तु मन का बोझ उसे व्याकुल किए हुए था। नींद आंखों से ओझल हो रही थी। रात के दो बज रहे थे और राजेश शून्य में छत की ओर देखे जा रहा था।साथ में सोई हुई पत्नी की आंख खुल गई और राजेश की हालत देख
अंदाजा हो गया कि कुछ तो बात है जो राजेश उस से छुपा रहा है..?? उसने पूछा “क्या बात है अब जाग रहे हैं..?? नहीं ऐसी कोई बात नहीं है! पत्नी बोली मेरी आंखों में झांककर बोलो क्या बात है! सहानुभूति पाकर राजेश का दबा लावा बाहर निकल गया और पत्नी को उस घटना की पूरी कहानी कह सुनाई। पत्नी ने कहा “एक मिनट रुको! इस दूर्घटना की ख़बर अखबार में जरूर छपी होगी। दोनों ने धड़कते दिल से
अखबार में देखा,,फ्रण्ट पेज पर ही न्यूज छपी थी। अज्ञात वाहन की टक्कर से बच्चा घायल हो गया है और मेडिकल कॉलेज में भर्ती है। पत्नी ने विश्वास दिलाया कि बच्चा मरा नहीं है, गंभीर हालत में है! हम कल चलकर उसे देखने जाएंगे और आर्थिक मदद भी करेंगे। याद रहे कि हम केवल मानवता के नाते मिलने जाएंगे यह नहीं बताएंगे कि हमारे कारण ये हादसा हुआ है। दूसरे दिन दोनो हॉस्पिटल गये और
बच्चे की हालत गंभीर थी मगर खतरे से बाहर थी। दोनों ने उसके माता-पिता (जो हालत से ही गरीब लोग रहे थे) को एक तरफ ले जाकर एक बड़ी रकम आर्थिक मदद के नाम पर देकर घर लौट आए! अब राजेश के मन का बोझ एकदम हल्का हो गया था। उसे संतोष इस बात का था कि वो बच्चा जीवित है। एक महापाप से कुछ हद तक मुक्ति पा चुका था।

राजेन्द्र परिहार”सैनिक “

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