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रक्षा बंधन – विनोद कुमार शर्मा

रक्षा बंधन बंधन नाता है प्यार का
भाई की श्रद्धा पर बहिन के इतवार का
धन दौलत बीच क्यों आए जगत में स्वार्थ भरा
स्वार्थ से इसे न जोड़ो न तोड़ो ये बंधन प्यार का
पांचों उंगली नहीं बराबर एक ही हाथ की
सबका काम जरूरी मुट्ठी बंधे सभी काम की
किस्मत सबकी अलग अलग फर्ज सरोकार का
बहिन  दुलार भाई का प्यार बात न अधिकार की
पैसे से न तौलोइनको कच्चे धागे हैं अनमोल
प्राणों की बाजी लगाते रक्षा में सुनें न कड़वे बोल
करतीं सदा दुआएं बहिनें अहम नहीं मन  में लातीं
एक रक्षा सूत्र कृष्ण द्रोपदी महाभारत विजय खोल
विनोद कुमार शर्मा

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