Welcome to Nazar India 24   Click to listen highlighted text! Welcome to Nazar India 24
Uncategorized

संस्मरण लेखन:पहला यादगार पत्र- पालजीभाई राठोड़ ‘प्रेम’ (सुरेंद्रनगर गुजरात)

 

जब पढ़ते थे तब पत्र तो जीवन में बहुत लिखा।मित्र रिश्तेदार से कई पत्र आया भी। कुछ पत्र ऐसे होते हैं जो नहीं भूलाए जाते। अपने मन मस्तिष्क पर छा जाते हैं।पत्र संवेदनाओंका सशक्त माध्यम है।अब मोबाइल युग में पत्र कम लिखे जाते हैं। पत्र जैसी खुबसूरती फोन में नहीं आती।
जब मैं पढ़ता था तब एक पत्र आया। ये पत्र गौरी का था। एक बार लग्न में मेरी बहन के साथ वो आई थी। पहली ही नजर में मुझे यह पसंद आ गई। हम साथ साथ लग्न में गए। तीन चार दिन हमने साथ में बिताए। इसके चेहरे की मुस्कान मेरे साथ बात करने का तरीका और उसकी आंखों में जब मैं देखता था तब प्रेम उभरता था।मुझे ऐसा लगता था कि वो भी मुझे पसंद करने लगी थी। लग्न के बाद वो भी अपने गांव चली गई। मैं भी पढ़ने के लिए शहर में चला गया। यहां पिताजी ने मेरी मंगनी मुझे पूछा भी नहीं और रेखा के साथ तय कर दी। गौरी ने पत्र में लिखा था। मैं ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं हुं।
पर मुझे लगता है आप मुझे पसंद करते हो। पत्र लिखकर मुझे बताना। मैं सच में पड़ गया। मन ही मन बोला;’मैं शरीर को प्रेम नहीं करता हूं आत्मा को प्रेम करता हूं। तुम मुझे पसंद हो मगर मैं कुछ नहीं कर सकता।’ उस पत्र का उत्तर देना मैंने मुनासिब नहीं समझा।वही पत्र मेरे जीवन का सबसे यादगार पत्र बन गया। वह पत्र मैने मेरी डायरी में गुलाब की पंखुड़ी के साथ रख दिया गया था। जब भी मैं देखता हूं गुलाब के पंखुड़ी सूख गई है। वो
स्मृति बनाकर वर्षों के बाद आंखों के सामने जीवंत हो उठना है।जो आने वाला है वह हमारे गुजरे कल से बेहतर होगा यह एक सोच आपको जीवन में कभी निराश नहीं होने देगी।

पालजीभाई राठोड़ ‘प्रेम’
(सुरेंद्रनगर गुजरात)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!