प्रलयकारी प्रकृति– सुमन दूबे साऊंखोर बड़हलगंज गोरखपुर

आज प्रकृति का एक अत्यंत भयावह और क्रोधी रूप देखने को मिल रहा है। चारों तरफ मूसलाधार बारिश से कोहराम मचा हुआ है, और तेज हवाओं के झोंके किसी तूफान की तरह तबाही ला रहे हैं। इन हवाओं के वेग से बड़े-बड़े पेड़ उखाड़कर इस तरह गिर रहे हैं कि मानों हर कुछ पलों में गहरी खामोशियाँ और सन्नाटा पसर जाता है। आसमान में छाए काले बादलों और गर्जना ने जनजीवन को पूरी तरह झकझोर कर दिया है।
यह भयानक दृश्य हमें यह सोचने पर विवश कर देता है कि सर्वशक्तिमान प्रकृति के आगे मनुष्य कितना असहाय है। आधुनिकता की दौड़ में इंसान ने पर्यावरण के साथ जो खिलवाड़ किया है, आज यह उसी का परिणाम प्रतीत होता है। जब प्रकृति का संयम टूटता है, तो उसकी शक्ति पलभर में बस्तियों को डरा देती है। यह समय हमें चेतावनी देता है कि हम समय रहते संभल जाएं, अत्यधिक दोहन बंद करें और प्रकृति के संतुलन का सम्मान करें, अन्यथा इसका यह रौद्र रूप और भी विनाशकारी हो सकता है।
सुमन दूबे साऊंखोर
बड़हलगंज गोरखपुर




