लेखन सांसों की डोरी — बबीता शर्मा

लेखन एक ऐसा वरदान है जो किसी भी निष्प्राण वस्तु को सजीव कर मानवीकरण के दर्शन करा देता है ।सामाजिक दशा के चित्रण लेखन के द्वारा ही संभव हो पाया जिसमें समाज का प्रत्येक दुख बोलता हुआ नजर आता है जिसको प्रेमचंद जी के नाटक,उपन्यास आदि में रूबरू होता देखा जा सकता है ।इसी प्रकार जयशंकर प्रसाद जी,मैथिलीशरण गुप्त ,निराला जी इत्यादि ने प्रकृति को ,मानव की सामान्य समस्याओं को खूब चित्रित किया है पाठक जब पढ़ते है तो उसके अंतर्गत इतना डूब जाते है कि स्वयं ही पात्र होने का आभास कर बैठते है ।
लेखन ही एक ऐसा माध्यम बना जो सगुण और निर्गुण में भेद होने पर भी एक होने का सार बताता है ।
लेखन के द्वारा ही प्रत्येक रस की अनुभूति संभव हो पाई है जो मानव को वीरता की ओर अग्रसर कर लक्ष्य प्राप्ति की ओर प्रेरित करता है । लेखन एक ऐसा शस्त्र है जो मूक को बोलना ,जड़ को चेतन और कायर को वीर बना सकता है लेखन साहित्य की वो आत्मा है मनुष्य को परमात्मा में विलीन कर एकाकार होने को प्रमाणित करता है ।
बबीता शर्मा




