Uncategorized

सुप्रीम कोर्ट का नोटिस—राजस्थान धर्म परिवर्तन कानून की वैधता पर बड़ी सुनवाई धार्मिक स्वतंत्रता बनाम कानून—सुप्रीम कोर्ट करेगा नौ राज्यों के कानूनों की संयुक्त जांच

 

सुमित कुमार बैरवा की रिपोर्ट। नजर इंडिया 24

नई दिल्ली/राजस्थान। राजस्थान के विधिविरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2025 की संवैधानिक वैधता अब सीधे सुप्रीम कोर्ट में तय होगी। देश की शीर्ष अदालत ने इस कानून को चुनौती देने वाली चौथी रिट याचिका पर राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की दो सदस्यीय पीठ ने 28 नवंबर को जारी किया। याचिकाकर्ताओं द्वारा यह कानून मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से जवाब मांगते हुए कहा है कि याचिका में उठाए गए संवैधानिक प्रश्नों पर विस्तार से स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया जाए।सबसे अहम बात यह है कि कोर्ट ने इस याचिका को देश के उन राज्यों की लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है, जहां समान एंटी-कन्वर्जन कानून लागू हैं।उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा और झारखंड। अब सुप्रीम कोर्ट इन सभी लगभग नौ राज्यों के फ्रीडम ऑफ रिलीजन/एंटी-कन्वर्जन कानूनों की एक साथ संवैधानिक समीक्षा करेगा। यह पहली बार है जब देश में बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन पर बने राज्य कानूनों की वैधता एक ही मंच पर तय की जाएगी। कानून विशेषज्ञों के अनुसार, इस सुनवाई का प्रभाव भविष्य में राज्यों की विधायी शक्तियों और नागरिकों के धार्मिक स्वतंत्रता अधिकारों दोनों पर महत्वपूर्ण पड़ सकता है। राजस्थान में भी यह कानून शुरू से ही राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बना हुआ है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!