बसंत ऋतु और मानव जीवन — सुनीता तिवारी

बसंत ऋतु और मानव जीवन का संबंध
बसंत ऋतु को प्रकृति का उत्सव कहा जाता है।
शीत की कठोरता के बाद जब धरती पर हरियाली लौटती है पेड़ों पर नई कोंपलें फूटती हैं और फूल रंग-बिरंगे रूप में खिल उठते हैं तब जीवन में भी नवचेतना का संचार होता है।
यही कारण है कि बसंत ऋतु का मानव जीवन से गहरा और आत्मीय संबंध है।
मानव मन प्रकृति से गहराई से जुड़ा है।
बसंत का मधुर मौसम मन को प्रसन्न, उत्साही और ऊर्जावान बनाता है।
इस ऋतु में न तो अत्यधिक ठंड होती है और न ही तीखी गर्मी, जिससे शरीर और मन दोनों संतुलन अनुभव करते हैं।
परिणाम स्वरूप व्यक्ति के विचार अधिक सकारात्मक होते हैं और सृजनशीलता बढ़ती है।
बसंत ऋतु प्रेम,आशा और सौंदर्य की प्रतीक मानी जाती है।
कवियों ने इसे श्रृंगार और उल्लास का आधार बनाया है तो समाज में यह ऋतु नए आरंभ, उत्सव और उत्साह का संदेश देती है।
मानव जीवन में भी जब आशा,उमंग और नवीनता का संचार होता है उसे बसंत के समान ही माना जाता है।
इस प्रकार बसंत ऋतु केवल मौसम का परिवर्तन नहीं बल्कि मानव जीवन को नवजीवन, संतुलन और सकारात्मक दृष्टि प्रदान करने वाली प्रेरक शक्ति है।
सुनीता तिवारी




