Uncategorized

जयपुर में 86वाँ श्री प्रेमभाया महोत्सव 11 से 14 मार्च तक, भक्ति संगीत से गुंजेगा परकोटा

युगल कुटीर, चांदपोल बाजार में चार दिवसीय भक्ति संगीत समारोह—देश-प्रदेश के भजन गायक देंगे प्रस्तुतियाँ, 14 मार्च को निकलेगा नगर संकीर्तन

 

जयपुर। हैरिटेज सिटी जयपुर को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाने में यहाँ की अद्भुत नियोजन एवं स्थापत्य कला के साथ-साथ परम्परागत तीज-त्यौहार, धार्मिक-सामाजिक गतिविधियाँ तथा संत-मनीषियों, विद्वानों और महान संगीतज्ञ कलाकारों की अनुकरणीय साधना का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन सभी ने इस विश्व प्रसिद्ध नगरी के गौरव में चार चाँद लगाए हैं।
इसी आध्यात्मिक परम्परा को आगे बढ़ाते हुए श्री प्रेमभाया सरकार के दरबार में संगीतमय हाजिरी लगाने देश-प्रदेश के कोने-कोने से भजन गायक, संगीतज्ञ और वाद्य विद्वान जयपुर पहुँचते हैं। जब परकोटे की गलियों में ढूंढाड़ी भजनों की स्वर लहरियाँ गूंजती हैं तो पूरा वातावरण भक्ति रस से सराबोर हो उठता है।
भक्त कवि पं. युगल किशोर जी शास्त्री का जन्म वर्ष 1916 में पुरानी बस्ती स्थित होली टीबा, युगल कुटीर (जयलाल मुंशी का रास्ता, चांदपोल बाजार, जयपुर) में राजवैद्य पं. गणेश नारायण जी के परिवार में वैशाख शुक्ल द्वादशी को हुआ। संस्कृत और आयुर्वेद के विद्वान पं. युगल किशोर जी शास्त्री भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य उपासक थे। उन्होंने अपने आराध्य श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को जयपुर की ढूंढाड़ी भाषा में “श्री प्रेमभाया सरकार” नाम देकर वर्ष 1940 में भक्ति की निर्मल धारा प्रवाहित की, जिसने समाज में प्रेम, भक्ति और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत संचार किया। यह भक्ति परम्परा आज भी ढूंढाड़ अंचल सहित देश-दुनिया में बसे हजारों भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान कर रही है।
शीतलाष्टमी के अवसर पर प्रारम्भ किया गया “श्री प्रेमभाया महोत्सव” जयपुर का एक विशिष्ट भक्ति संगीत समारोह बन चुका है, जिसकी प्रतीक्षा केवल जयपुर ही नहीं बल्कि देश-दुनिया में बसे भक्तगण वर्ष भर करते हैं।
समिति के संरक्षक विजय किशोर शर्मा ने बताया कि इस वर्ष 86वां श्री प्रेमभाया महोत्सव 11 मार्च से 14 मार्च 2026 तक युगल कुटीर, जयलाल मुंशी का रास्ता, चांदपोल बाजार, जयपुर में आयोजित किया जाएगा।
समिति के अध्यक्ष दुर्गा चौधरी ने बताया की महोत्सव के अंतर्गत 11 मार्च को दिन में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्री प्रेमभाया सरकार का पंचामृत अभिषेक कर नवीन पोशाक धारण कराई जाएगी। इसके पश्चात 11, 12 एवं 13 मार्च को रात्रि 8 बजे से संपूर्ण रात्रि भक्ति संगीत समारोह आयोजित होगा, जिसमें देश-प्रदेश के सुप्रसिद्ध भजन गायक एवं संगीतज्ञ अपनी प्रस्तुतियाँ देंगे।
इसके साथ ही 12, 13 एवं 14 मार्च को दिन में महिला मंडलों द्वारा भक्ति संगीत का आयोजन किया जाएगा।
नगर संकीर्तन 14 मार्च को सायं 7 बजे नगर संकीर्तन से होगा, जो सत्संग स्थल से प्रारम्भ होकर परकोटे के विभिन्न मार्गों से होता हुआ प्रातः 7 बजे पुनः सत्संग स्थल पहुँचकर सम्पन्न होगा।

चारदिवसीय की परम्परा —
विशेष बात यह है कि इस वर्ष महोत्सव चार दिवसीय होगा। भक्त शिरोमणि युगलजी महाराज ने वर्ष 1940 से युगल कुटीर में श्री प्रेमभाया को समर्पित प्रत्येक शनिवार को नियमित सत्संग प्रारम्भ किया था, जो आज भी निरंतर जारी है। जब शीतलाष्टमी बुधवार को आती है, तब शनिवार के उत्सव को भी महोत्सव में सम्मिलित कर इसे चार दिवसीय भक्ति संगीत समारोह के रूप में मनाया जाता है।

प्रवक्ता
लोकेश शर्मा

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!