मानसरोवर साहित्य अकादमी का पहला ऑफलाइन पंजाबी साहित्यिक समारोह रहा ऐतिहासिक

जयपुर। राजस्थान में पंजाबी साहित्य को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मानसरोवर साहित्य अकादमी द्वारा प्रथम ऑफलाइन पंजाबी साहित्यिक समारोह का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन साहित्य प्रेमियों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बन गया, जिसने पंजाबी भाषा और संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य किया। समारोह में 400 से अधिक प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही। हॉल तालियों की गूंज और दर्शकों के उत्साह से सराबोर नजर आया। कार्यक्रम के दौरान कवियों और लेखकों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से संवेदनाओं, सामाजिक सरोकारों और रचनात्मकता की प्रभावशाली अभिव्यक्ति प्रस्तुत की, जिसने श्रोताओं का दिल जीत लिया। इस अवसर पर अकादमी के संस्थापक मानसिंह सुथार, अध्यक्षा सिया भारती, निदेशक डॉ. वंदना ठाकुर एवं महासचिव इकबाल सिंह सहोता विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी पदाधिकारियों ने अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प दोहराया।
कार्यक्रम का सफल संचालन जसवंत कौर ग्रेवाल, जसवीर कौर जस्सी और महेंद्र सूद विर्क ने शानदार अंदाज में किया, जिससे पूरा माहौल जीवंत बना रहा।समारोह में विश्व प्रसिद्ध पंजाबी कलाकार घुल्ले शाह सहित हरी सिंह जाचक, डॉ. गुरचरण कौर कोचर, तजिंदर चंडिहोक (पूर्व ए.एस.पी.), गुरबख्श सिंह रायत, जसविंदर सिंह जस्सी, डॉ. टिक्का जे.एस. सिद्धू, सतबीर सिंह, जसविंदर सिंह चहल, कुसुम गुप्ता, अर्जुन अवार्डी सुच्चा सिंह और जगदीश नांगलू जैसी प्रतिष्ठित हस्तियों को सम्मानित किया गया। समारोह के अंत में सभी उपस्थित जनों के चेहरे पर संतोष और खुशी स्पष्ट झलक रही थी। यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पंजाबी साहित्य और संस्कृति से जुड़े लोगों का एक भावनात्मक संगम साबित हुआ, जिसकी यादें लंबे समय तक सभी के मन में जीवित रहेंगी।




