विशुद्ध साहित्य समाज की ज़रूरत : अंजली सरधना
जयपुर/ऑनलाइन, 25 मार्च 2026।
‘युवा क्रांति साहित्यिक मंच’ के बैनर तले 25 मार्च की रात्रि 8 बजे एक भव्य, ऐतिहासिक एवं विशुद्ध ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार विवेक कवीश्वर ने की, जबकि संचालन अमरपाल ‘अमर’ ने कुशलतापूर्वक संभाला। मंच की संस्थापिका अंजली सरधना द्वारा माँ सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके पश्चात स्वाति ने आदर्श काव्य पाठ प्रस्तुत किया, वहीं राखी की प्रभावशाली प्रस्तुति ने श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया।
कार्यक्रम में शब्द कुटीर मंच की अध्यक्षा एवं समाजसेविका साधना शर्मा “सरगम” ने अपनी भावपूर्ण रचना “छोड़कर के मुझे माँ चली तू कहाँ, बिन तुम्हारे कोई अब सहारा नहीं” का पाठ किया, जिसने उपस्थित सभी श्रोताओं को भावुक कर दिया। झज्जर की युवा कवयित्री सोनिका ‘सवेरा’ ने महिला सशक्तिकरण पर अपनी सशक्त अभिव्यक्ति हम अपने हिस्से की ज़मीं चाहती हैं के माध्यम से प्रस्तुत की। वहीं रेवाड़ी से अंग्रेज़ी प्राध्यापक पंकज हारीत ने दो अलग-अलग विषयों पर गीत सुनाए।
उत्तर भारत के प्रख्यात कवि एवं हिंदी प्राध्यापक जयसिंह ‘जीत’ ने सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए कहा, हमें नफरतों को मिटाना पड़ेगा, अमन-चैन से दिल लगाना पड़ेगा। विकास ने अपनी बुलंद आवाज़ में मन की भावनाओं और बुजुर्गों के सम्मान पर प्रभावी काव्य प्रस्तुत किया।
छात्र जश्न कुमार ने अपनी क्रांतिकारी रचना सोता हिंदू के माध्यम से समाज को जागरूक करने का प्रयास किया। अंजली सरधना की बहन पूजा ने अपनी पहली प्रस्तुति में भावनात्मक रचना सुनाई, जबकि कार्यक्रम के अंत में उत्कर्ष ने भी सराहनीय काव्य पाठ किया।
संचालक अमरपाल ‘अमर’ ने अपने प्रभावशाली संचालन से पूरे कार्यक्रम को रोचक बनाए रखा। कार्यक्रम के अंत में यह निष्कर्ष सामने आया कि इस प्रकार की विशुद्ध साहित्यिक गोष्ठियां समाज को नई दिशा देने के साथ-साथ देशभक्त एवं परमार्थी युवाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे भारत को एक विकसित और सशक्त राष्ट्र बनाने का मार्ग प्रशस्त होता है।




