माता -पिता -गुरु — महेन्द्र कुमार सिन्हा जय महासमुंद छत्तीसगढ़

कहते है कि माता पिता गुरु के चरणों में ही चारों धाम है।जब बालक जन्म लेता तो उसकी पहली गुरु माता को कहा जाता है। माता ही बच्चे को अपनी संस्कार अपनी स्तनपान से कराते है, और थोड़े से बड़े होने पर बोलना, चलना सीखाते है। शिशु का दुसरा गुरु उसके पिता होता है, जो बालक को दुनिया दारी की बातें सीखाता है। बच्चों का अच्छे परवरिश कर अच्छी शिक्षा सुविधा उपलब्ध कराते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान किया करते है। बच्चों का तीसरा गुरु सद्गुरु भगवान है। गुरु में ही तीनों देवों, ब्रह्मा विष्णु महेश का वास होता है।
सद्गुरु भगवान की कृपा से बालक में आत्मविश्वास, आत्ममंथन, आत्मशक्ति आत्मचिंतन करना सरल हो जाता है। सद्गुरु भगवान की कृपा से बालक मेधावी, कीर्तिमान , यशस्वी होता है।
वेद शास्त्र उपनिषद पुराणों भी गुरु की महिमा को गाया गया है। इसीलिए कहा जाता है कि माता पिता गुरु के चरणों में चारों धाम है।
महेन्द्र कुमार सिन्हा जय
महासमुंद छत्तीसगढ़




