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अंजान चेहरों के छोड़े हुए निशान — जज़्बात ए हर्षिता

 

हर रास्तों में कोई न कोई सबक मिलता है, कहीं कोई कुछ कह जाता है, कहीं को सिर्फ़ एक इशारा कर जाता है,कही कोई शिकन होती है चेहरे पर, कही कभी एक सवाल होता है, कही कभी अंजनी हंसी होती है, कही कोई मुस्कान होती है क्योंकि हर कोई किसी को थोड़ी जानता है ,मगर। अंजान इंसान भी एक पल का ख़्याल बन कर हमारे ज़हन में एक मार्क छोड़ जाता है,कभी सोचती हूं हमारे कार्मिक रिश्तों के बारे में जो कुछ सीखने आते है, जो सिर्फ मुस्कान देने आते है, कुछ एक पल की खुशी दे जाते है, कुछ। रस्ते भर का साथ निभाते है, कुछ जिंदगी में ठहर जाते हैं, कुछ सवाल ही उठाते है, कुछ सुकून दे जाते है, कुछ प्रभु की देन खून के रिश्तों से बढ़े होते। है , कुछ रिश्तों के नाम नहीं होते है, मगर शायद कभी हमारे लिए सही और औरों के लिए गलत ही होते है, अगर सबको यहीं कहना होता है जो दिल को खुद को अच्छा लगे करो तो हम रिश्तों को निभाने के लिए वक्त के हालातों के मौहताज हो जाते है, कुछ समाज की बंदिशों में बंधी एक अनदेखी डोर में फंसे होते है, कुछ सुकून की तलाश में खुद की खोज में निकल जाते है, कुछ पितृसत्ता की बात में खुद को समझ नहीं पाते है, कुछ हालातों की बारिश में खुद पर ही इलज़ाम लगा लेते है, मगर खुद को खुशी का क्या है??
समाज आएगा पूछने तुम खुश हो?
समाज आएगा पूछने तुमने रोटी खाई?
समाज आएगा पूछने तुमको दर्द है?
समाज आयेगा पूछने तुम्हे कुछ चाहिए?
समाज आयेगा ये कहने की तुम्हे हम समझते है???
कौन है वो चार लोग जो हमेशा सुनने में आते है?
अपनी खुशी के लिए जी लो किसी को कुछ फर्क नहीं पड़ता और
समाज लोगो से बनता है
अपनी खुशी का स्टीरिंग अपने हाथ में थाम कर अपनी सुकून को जी लो.
कल हो न हो

जज़्बात ए हर्षिता

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