केंद्रीय राज्य कानून मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल जी ने शोकाकुल परिवार दी सांत्वना, व भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की

स्वतंत्र पत्रकार घनश्याम शर्मा। नज़र इंडिया 24
श्रीगंगानगर। 17 अगस्त को केंद्रीय राज्य कानून मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल जी ने 8-D-7 जवाहर नगर, सेक्टर 8, श्रीगंगानगर स्थित श्री केसरा राम दहिया जी एवं उनकी धर्मपत्नी मंजू दहिया जी के आवास पर पहुँचकर उन दोनों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। यह अवसर अत्यंत भावुक कर देने वाला था, क्योंकि मेघवाल जी का स्वर्गीय श्री केसर राम दहिया जी के साथ कई दशकों पुराना पारिवारिक संबंध रहा है। यह संबंध उस समय के हैं, जब श्री अर्जुन राम जी ने राजनीति में कदम भी नहीं रखा था—बल्कि यह मित्रता और आत्मीयता का वह बंधन है, जो समय के साथ और गहरा होता गया।
इस शोक की घड़ी में मेघवाल जी के आगमन पर दहिया जी के पूरे परिवार ने उनका हार्दिक स्वागत किया। इस अवसर पर परिवार के सदस्य दोनों पुत्र धर्मेंद्र दहिया एवं पुष्पेंद्र दहिया ,सुपुत्री दीपिका, व दामाद दीपक कुमार तथा वरिष्ठ पत्रकार घनश्याम शर्मा जी भी उपस्थित रहे।
श्री केसरा राम दहिया जी का पूरे दलित समाज में, न केवल गंगानगर बल्कि संपूर्ण राजस्थान में, अत्यंत महान एवं सम्माननीय स्थान था। वे किसी भी प्रकार की संकीर्ण दलगत राजनीति से सर्वथा परे थे। चाहे किसी भी राजनीतिक दल का कार्य हो, वे हर कार्य के लिए सदैव तत्परता से तैयार रहते थे। सभी बड़ी-बड़ी पार्टियों में उनका विशेष मान-सम्मान था।
मंत्री जी ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि देते हुए स्वर्गीय दहिया जी व उनकी धर्मपत्नी को पुष्पांजलि अर्पित की और उनके जीवन के उज्ज्वल कार्यों को याद किया। उन्होंने पूरे परिवार से आत्मीयता से मिलते हुए कहा कि यह दुखद क्षण उनके लिए भी अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने परिवार के प्रत्येक सदस्य को आश्वस्त किया कि वे इस मुश्किल समय में उनके हर कदम पर साथ खड़े रहेंगे—ठीक उसी प्रकार, जैसे एक परिवार अपनों की पीड़ा में साथ निभाता है।
मेघवाल जी ने यह भी वचन दिया कि आने वाले समय में भी वे इस परिवार के सदस्यों को अपने परिवार के समान ही सम्मान और स्नेह देंगे, और किसी भी आवश्यकता में उन्हें पूर्ण सहायता प्रदान की जाएगी। उनके इस सहज, सौम्य और संवेदनशील व्यवहार ने वहाँ उपस्थित सभी लोगों का हृदय जीत लिया। यह सांत्वना यात्रा न केवल एक राजनीतिक व्यक्तित्व का औपचारिक दायित्व थी, बल्कि एक सच्चे मित्र, एक परिवार-जन के रूप में उनके गहरे लगाव और मानवीय संवेदना का प्रतीक रही।




