Uncategorized

आमेर किला, जयपुर – नरसा राम जांगु 

 

जहाँ हर पत्थर में शौर्य बसा है और हर झरोखे से इतिहास झाँकता है।
सूरज की पहली किरण यहाँ आज भी राजतिलक करती है।

जयपुर की अरावली पहाड़ियों के आँचल में बसा आमेर का किला, आज भी अपने शौर्य और शिल्प की गाथा सुनाता प्रतीत होता है। प्रातःकालीन सूर्य की सुनहरी आभा जब इसकी पीली-लाल बलुआ पत्थर की प्राचीरों पर पड़ती है, तो पूरा किला सोने-सा दमक उठता है।

मैंने देखा – नीचे मावठा झील शांत दर्पण-सी बिछी है, जिसमें किले का प्रतिबिम्ब लहरा रहा है। किले के मुख्य द्वार ‘सूरजपोल’ से प्रवेश करते ही दीवान-ए-आम और दीवान-ए-खास की नक्काशी, शीश महल में हजारों छोटे-छोटे शीशों की जगमगाहट आँखों को चकाचौंध कर देती है। ऐसा लगता है जैसे एक दीया जलाने पर पूरा आकाश तारों से भर गया हो।

गणेश पोल पर बनी सूक्ष्म चित्रकारी, महलों के झरोखों से आती ठंडी हवा और हाथी की सवारी करते विदेशी पर्यटकों की उत्सुकता – सब मिलकर एक जीवंत इतिहास रच रहे थे। किले की बुर्ज से जयपुर शहर का दृश्य देखते हुए लगा कि समय थम गया है, और राजपूताना का गौरव आज भी इन पत्थरों में जीवित है।

—
नोट: यह रेखाचित्र व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है, किसी अनजानी त्रुटि हेतु लेखक जिम्मेदार नहीं है।

लेखक – नरसा राम जांगु (राजस्थान)
स्थान : जयपुर, राजस्थान | दिनांक : 29 अगस्त, 2026

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Click to listen highlighted text!
error: Content is protected !!