मेरे सपनों का विद्यालय – एक सुंदर दृश्य , लेखक – नरसा राम जांगु राजस्थान

सुबह के दस बजे हैं। मैं विद्यालय के मुख्य द्वार पर खड़ा हूँ। सामने ही बहुत बड़ा और सुंदर विद्यालय भवन है। भवन पर सफेद और पीले रंग का रोगन है जो धूप में चमक रहा है। बीच में अशोक स्तंभ बना है और तिरंगा लहरा रहा है।
भवन के सामने हरा-भरा मैदान है। मैदान में छात्र-छात्राएं खेल रहे हैं। कुछ बच्चे कबड्डी खेल रहे हैं, कुछ खो-खो और कुछ फुटबॉल। लड़कियाँ रस्सी कूद रही हैं। सबके चेहरों पर खुशी है। खेलते हुए उनकी मीठी आवाजें पूरे मैदान में गूँज रही हैं।
भवन के बरामदे में प्रार्थना के बाद कक्षाएं लग चुकी हैं। एक तरफ स्टाफ कक्ष है, जहाँ अध्यापक अगले कालांश की तैयारी कर रहे हैं। उसके बगल में प्रधानाध्यापक कक्ष है। प्रधानाध्यापक जी अपनी कुर्सी पर बैठे सभी कक्षाओं का निरीक्षण कर रहे हैं। उनका कक्ष साफ-सुथरा और अनुशासित है।
प्रधानाध्यापक कक्ष के पास ही पुस्तकालय है। पुस्तकालय में सैकड़ों किताबें अलमारियों में सजी हैं। कुछ विद्यार्थी वहाँ बैठकर शांत मन से पढ़ रहे हैं।
यह दृश्य देखकर मन प्रसन्न हो जाता है। ऐसा लगता है जैसे यह केवल एक विद्यालय नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और खुशियों का मंदिर है।
लेखक – नरसा राम जांगु राजस्थान




