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हमारे आहार का हमारे विचारों पर बहुत प्रभाव पड़ता है। — रमेश शर्मा

निश्चित रूप से हमारे आहार का हमारे विचारों पर बहुत प्रभाव पड़ता है। एक पुरानी कहावत है कि जैसा खावे अन्न, वैसा रहे मन्न।
कहने का अर्थ है कि सनातन संस्कृति में मनुष्य की तीन प्रवृत्ति बताई गई हैं सात्विक, राजसिक एवं तामसिक। मनुष्य इन तीन प्रवृत्तियों से ग्रसित रहता है। हमारे साधू संत सात्विक प्रवृत्ति के होते हैं क्योंकि वह सात्विक भोजन करते हैं। जिसमें फल, मेवा, एवं शुद्ध शाकाहारी सुपाच्य भोजन शामिल हैं। साधू संत हर व्यक्ति के यहाँ का भोजन स्वीकार नहीं करते।
जिस तरह का भोजन हम करते हैं उसका प्रभाव आवश्यक रूप से हमारे मन और विचारों पर प्रभाव डालता है।
रमेश शर्मा




