जिंदगी ना मिलेगी दोबारा — पालजीभाई वी राठोड ‘प्रेम’

जिंदगी कभी भी दोबारा नहीं मिल सकती।जिसका जन्म हुआ है उस की मृत्यु निश्चित है।इस जगत में मृत्यु ही सनातन सत्य है। सदैव इस बात का हमें ध्यान रखना है। एक दिन यह शरीर का त्याग करना है। यही प्रकृति है। इस जीवन मिला है तो कुछ अच्छे सत्कर्म करते जाना है। लोभ मोह मद अहम जैसे दुर्गुणों को छोड़ना है।जीवन में प्राप्त की हुई धन संपत्ति यहां ही रह जाएगी। सिर्फ अपने कर्म ही साथ आता है। अच्छे बुरे दोनों कर्म का फल हमें भुगतना पड़ता है। जैसा कर्म करेगा वैसा फल पाएगा। इसीलिए हमें जो जीवन मिला है उसमें अच्छे कर्म सिंचित कर लेना चाहिए। सत्कर्म से हमें एक नई राह मिलती है। हमारे वाणी बर्तन व्यवहार अच्छे रखने हैं।मृत्यु कब कब आएगी पता भी नहीं चलेगा। इसीलिए जो समय मिला उसी का हमें सदुपयोग करना है। दीनों की सेवा करना ही सच्चा मानव धर्म है।त्याग समर्पण से ही हमें अच्छे परिणाम मिलते हैं और जो मंजिल पानी है वह हमें मिलती है।आज जो भी हमें प्राप्त किया है बस वही हमारी पहचान बनकर रह जाती है।जीवन मिला है सुख दुःख एक परछाई की तरह आता जाता रहता है। सुख दुःख में व्यक्ति को सम रहना है। सुख में अहंकार नहीं पालना है और दुःख का धैर्य पूर्वक सामना करना है सुख को जो बांटता है उसका दुख का भर काम हो जाता है। अपनापन भी बढ़ता रहता है।कभी भी जीवन में भटक जाए तो ईश्वर को याद करना है। शेष समय समय प्रभु में व्यतीत करना।जीवन में चढ़ाव उतार आते रहते है। हम दूसरों के लिए कितने उपयोगी हुए दूसरों के लिए कितने जिए बस वही महत्वपूर्ण है।परोपकार में जीवन बिताना है।दूसरों के प्रति दया भाव पालना है। बड़ों का हमें सम्मान करना है। जीवन में सद्भावना रखती है।वही जीवन का खरा अर्थ समझते हैं।वही अच्छा इंसान कहलाता है।हमारे जीवन में जो वक्त चला जाता है वह वापस नहीं आता। जैसे घड़ियों के कांटे कभी उलटी और नहीं चलता। तुम कुछ भी करो जो वक्त चला गया वो वापस नहीं आता। जिंदगी ना मिलेगी दोबारा।
“जीवन उसका धन्य हुआ औरों के हित जीना,
सदा बांटता प्यार सभी के जग का दुःख पिता।
श्री पालजीभाई वी राठोड ‘प्रेम’
(सुरेंद्रनगर-गुजरात)




