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महिला आरक्षण – विनोद शर्मा

संसद में महिलाओं को आरक्षण स्वागत योग्य सकारात्मक कदम है लेकिन उसमें भी राजनीति दोनों पक्ष विपक्ष की ओर से हो रही तो ऐसा लगा जैसे सिर्फ अपने अपने फायदे के लिए संसद के विशेष सत्र को स्तेमाल किया गया जब संविधान संशोधन के लिए बहुमत नहीं होता तब सरकार को बिल पेश करने से पहले बाहर पूरी तैयारी होमवर्क करके पेश करना चाहिए था और विपक्ष को भरोसे में लिए बिना पास होना संभव नहीं तो प्रक्रिया सिर्फ राजनैतिक लाभ लेने की होड़ के अलावा कुछ नहीं
क्या पार्टी में महिला सांसदों को आरक्षण अनुसार वर्तमान में मंत्रिमंडल में जगह नहीं देना चाहिए थी और आज महिलाओं की भागीदारी कितनी है किसी से छुपा नहीं महिलाओं को आरक्षण और संसद में सांसदों की संख्या के लिए परिसीमन पहले किया जाना चाहिए इन मुद्दों पर बात तक नहीं बनी कुछ पार्टियां आज भी महिलाओं को घूंघट में ही देखना चाहते
अगर नियत साफ है तो महिला आरक्षण विभिन्न दलों की पार्टीयों संगठनों में पदों पर महिलाएं विधान सभा में लोकसभा राज्य सभा में उनकी पर्याप्त संख्या दिखनी चाहिए थी दूसरी तरफ बहस चल रही महिलाओं को राजनीति में फ्रंट लाइन में पहुंचने से पहले भारी कीमत चुकानी पड़ती।
विनोद शर्मा

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