प्रहरी मंच की मासिक काव्य- गोष्ठी सम्पन्न
जयपुर। दिनांक 17 अप्रैल 2026 को प्रहरी
मंच के संस्थापक अध्यक्ष आदरणीय श्री नरेश नाज, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डाॅ मीता गुप्ता, पश्चिम बंगाल की सदस्य श्रीमती अंशु गुप्ता के सान्निध्य में ऑनलाइन मासिक काव्य -गोष्ठी भव्य रूप से सम्पन्न हुई।
गोष्ठी का आगाज़ श्रीमती चंचल शर्मा “चपल “द्वारा माँ सरस्वती की आराधना ” कागज तपोभूमि लेखनी का साधन है,
लेखन ही साधना मेरी शारदा आराधन”की सुमधुर प्रस्तुति से हुआ।
श्री रामकिशोर जी ने सामाजिक विसंगति पर करारा प्रहार करते हुए ” नामों के भी कोड हों, तब होगा कल्याण।
नामों से चलता पता, कौन राम रहमान”दोहे सुनाकर दाद हासिल की।
निशा बुधे झा ने बाल कविता ” गर्मी की छुट्टी आते ही हम तो चल दिये मामा के गाँव “सुनाकर बचपन को सजीव कर दिया।
चंचल शर्मा ने “फर्क नहीं पड़ता कुछ भी, पर फर्क बहुत पड़ता है” गीत के माध्यम से मार्मिक अभिव्यक्ति की।
कमलेश चौधरी ने माँ कविता”किरिच किरिच टुकड़ों में बँट रही थी माँ, जब घर का हो रहा था बँटवारा “में माँ की मनोदशा का सुंदर चित्रण किया।
पुष्पा माथुर ने युद्ध खत्म हो और अमन, चैन शांति की स्थापना हो, इस आशा को–शाँति है वो सद्भाव, जिससे जीत पाए वो अपनी जंग” शब्दों में कुछ यों पिरोया।
अर्चना माथुर ने”शबाब ए इश्क के इम्तिहान की तैयारी कर ली शास्त्रीय संगीत की सुमधुर प्रस्तुति दी।
ज्योत्सना सक्सेना ने माहिए और दोहे “करते झुककर वंदन, कभी बने ऐसे जैसे सुरभि चंदन के द्वारा नम्रता की जीवन में आवश्यकता पर बल दिया। श्रीमती उषा वर्मा वेदना ने “अश्रु “कविता में यह आंसू पलकों पर आकर ठहर जाते हैं ,बहते नहीं, के माध्यम से सभी को भाव विभोर कर दिया ।
सुजाता पुरोहित में समसामयिक परिवेश में व्याप्त ज्वलंत समस्या युद्ध के परिणामों को रेखांकित करते हुए कहा-” टूटती इमारतें ,मल्बे में दबे मासूम बच्चे ,शोचनीय स्थिति का सुंदर चित्रण किया ।
श्रीमती अंजना चड्ढा ने अपनी ग़ज़ल “एक दिन क्यों हुआ कि उनसे बिछुड़ गए” के माध्यम से वियोग श्रृंगार की बहुत सुंदर अभिव्यक्ति की ।
कमलेश शर्मा ने अपनी कविता “कभी-कभी सोचती हूंँ क्यों नहीं चयनित होती मेरी कविताएंँ” के माध्यम से कुंठा को प्रेरणा में परिवर्तित होते देखा ।सीमा लोहिया में वर्तमान परिवेश में हो रहे मानवीय व्यवहार पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा “कभी आम बनाएगा कभी खास बनाएगा ,लोग अपनी ही जरूरत का लिबास बनाएंगे” के माध्यम से सुंदर प्रस्तुति दी।
पश्चिम बंगाल के सदस्य श्रीमती अंशु गुप्ता ने कृष्णा और कृष्णप्रिया कविता की प्रस्तुति बहुत भावपूर्ण तरीके से करते हुए कहा ” मैं ही वामन का तीन अंग हूँ, मैं ही हूँ अतुल्य नग।
इकाई सचिव श्रीमती गुप्ता मीता जोशी ने” एक दिन ये रूप ,ये रौनक ये रंगत सभी चली जाएगी ,चेहरे की झुर्रियां तमाम किस्से बताएंँगी” के माध्यम से अनुभव की महत्ता को रेखांकित किया ।

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ मीता गुप्ता ने “साड़ी” कविता के माध्यम से साड़ी के प्रकारों का जिक्र करते हुए मां की साड़ी के प्रति लगाव को प्रदर्शित कर अपने निराले अंदाज़ से श्रोताओं को मंत्र -मुग्ध कर दिया।
संस्थापक अध्यक्ष आदरणीय आदरणीय नरेश नाज़ जी ने रस परिवर्तन करके श्रृंगार रस में खूबसूरत गज़ल “छूकर बुलंदियों को जमाने को झुका दो. इतना तो आज इश्क में पैदा कर असर” के द्वारा श्रृंगार रस की सरिता में प्रवाहित कर कार्यक्रम में चार चांद लगाए।
अंत में इकाई अध्यक्ष डॉक्टर कंचना सक्सेना ने “भयानक मंजर” कविता के माध्यम से ट्रंप और पुतिन को हिटलर और मुसौलिनी का प्रतीक अथवा पर्याय बताते हुए युद्ध से उत्पन्न त्रासदी का जिक्र किया।
कार्यक्रम के अंत में डाॅ कंचना ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। ।
डाॅ कंचना सक्सेना,
अध्यक्ष ,
प्रहरी मंच राजस्थान इकाई




