Uncategorized

संस्मरण जो नहीं भूल पाए। नीलम सोनी फॉर्म ब्यावर राजस्थान

 

जिंदगी में कभी कभी कुछ ऐसे पल आ जाते । अपनी पहचान खुद से करवा के चले जाते। भगवान ने हमे इंसान बना कर कोई गलती तो नहीं की।वो पल जिंदगी अपनी छाप छोड़ चले जाते। इंसान चाह के भी नहीं भुला पाता है।ऐसी एक घटना मेरी जिंदगी में घटित हुई । और मुझे मेरी आत्मा को झंझोर के रख दिया था। गर्मियों के दिन थे।कभी कभी बीपी हाई के वजह से तबीयत खराब हो जाया करती थी। एक दिन ऐसे बीपी बढ़ जाने से मुझे मेरे हसबैंड हॉस्पिटल लेके गए। डॉ को दिखाने के बाद । वो दवाई लेने चले गए थे। में हॉपिटल के बाहर उनका इंतजार कर रही थी। एक टेबल पर बैठ गई थी। उसी समय एक ओल्ड बूढ़ी दादी जी आए । जिनकी उम्र ८० के थे।मेरे पास आए मुझे पूछा। बेटा आपके पास फोन हो तो मेरे बेटे के लगा के बात करवा दो, वो मुझे २ घंटे हो गए। छोड़ के गया। अभी तक लेने नहीं आया।मुझे एक डायरी दी उसमें कुछ नम्बर लिखे हुए थे।उनके बेटे का नाम बताया।मेने फोन लगा के बात कि।जो उनके बेटे ने बोला।मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। बेटा बोला में नहीं ले जा सकता मेरी मां को, मेरी बीवी को एतराज है मेरी मां मेरे पास रहती है तो। घर में झगड़ा होता है।आप इन्हें कोई वर्धा आश्रम में छोड़ दो।जिस मां की नजर अपने बेटे को ढूंढ रही । उसे कैसे कह दूं। वो बेटा आपके लिए ऐसे बोल रहा।मैने कुछ बहाना बना के बोला। बेटा कही बाहर चला गया। उसे टाइम लगेगा।और किसी के नम्बर हो तो बताओ। वहां से बात करवा दूं। फिर उन्होंने अपनी बेटी का नाम लिया। उसके भी फोन लगाया मेने बात की आपकी माता जी आपका इंतजार कर रही। आप आओ लेके जाओ। तो बेटी ने भी जो जवाब दिया। मेरा इंसानियत से भरोसा उठ गया। मेरी मां को में नहीं ले जा सकती। मेरे ससुराल वाले ऑब्जेक्शन उठाते हैं। मेरे पति को पसंद नहीं।फोन काट दिया। इतने में मेरे हसबैंड दवाई लेने गए। वो आ गए थे। इतनी जल्दी इतना कुछ हो गया समझ नहीं आ रहा था। मेरे पर्स मे जो भी पैसे थे। उन दादी जी को देके में और बोल के वहां चली गई।आपके बच्चे आ रहे थोड़ी देर में।घर पर आने के बाद में घर के काम करने लग गई। लेकिन दिमाग तो उन दादी जी पे था । वो अब कहा जाएंगे। कुछ खाया होगा या नहीं। रात के १० बज गए थे। मुझसे रहा नहीं गया, उनके दोनों बच्चों के नम्बर मेरे फोन में थे, तो मैने वापस उन्हें फोन लगाया बेटा, बेटी दोनों को समझाया जिस मां ने तुम्हे जन्म दिया, इतना बड़ा किया इतना लायक बनाया, आज उसी मां को तुम्हारी जरूरत है।तुम लोग उसे यूं मरने के लिए छोड़ रहे।दोनों बच्चों को मैने सुनाया।मेरा वैसे कोई हक नहीं था।पर में अन्दर से भर गई थी।रात भर मुझे नींद नहीं आई।उसके बच्चे उसे लेने गए होंगे नहीं होंगे। सुबह उनके बेटे का मेरे पास फोन आया । में रात को आपसे बात करने के बाद में मेरी माता जी को हॉस्पिटल लेने गया था।लेकिन वो मुझे वहां मिले नहीं। मेरी बेचनी और बढ़ गई थी।कहा गए होंगे वो दादी जी।किस हालत में होंगे। मुझे उनके बच्चों से ज्यादा गुस्सा मुझ पर आ रहा था। में। अन्दर ही अन्दर अपने आप को कोस रही थी। कास में इतनी लायक होती तो अपने साथ उनको अपने घर पे लेके आ जाती।अगर मुझे भी ससुराल वालों का डर ना होती। जब मुझे महसूस हुआ। मुझे जिंदगी तो मिली उसे सिर्फ खाने पीने सोने में निकाल रही हु। जो एक जानवर भी वही करता है। जब मेरी मुलाकात खुद से हुई।मैने कसम अपने आप से खाई। मरने से पहले दुनिया के कोने कोने हर गरीब बच्चों के लिए स्कूल घर हर बेबस औरत के लिए घर बना के जाऊंगी। जिसे कभी सोचना ना पड़े। इनके बच्चे बड़े होने के बाद कोई छोड़ के भी चले जाए तो में उन्हें अपने पास रख के उनकी सेवा कर सकू। आज भी वो दिन वो बाते में कभी भूल नहीं पाई। वो मेरी जिंदगी कि असमरणीय घटना थी।आज जो भी एक कोशिश करती हु अपनी जिंदगी मे बस यही प्रयास करती हु।भगवान मुझे इतना लायक बनाना। दुनिया मे कोई भी मां इधर उधर ठोकर ना खाए। मनुष्य जीवन दिया है तो कुछ ऐसा कर के जाए। जाने के बाद भी लोग दुआओं मे याद करे। नीलम सोनी फॉर्म ब्यावर राजस्थान

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!