मां — नीलम सोनी की कलम से

सबसे छोटा शब्द है मां, पर मां से बड़ा कोई अर्थ नहीं है।
पूरी सृष्टि में ऐसी कोई कलम नहीं जो मां का बखान लिख सकू।एक जन्म क्या कई जन्म कम पड़ जाएंगे।मां के बारे में लिखने बैठे।कागज के टुकड़ों पर शब्दों के कभी भाव नही लिख पाएंगे। मां तुम मेरे जीवन की परिभाषा हो।सब कह रहे है। आज मां का दिन है। पर ऐसा कौनसा दिन नहीं जो मां के बिना हो। मां का प्रेम वो अमृत है।जिसे पाने के लिए स्वयं परमात्मा भी तरसते है।मां एक शब्द नहीं, बल्कि मां शब्द में पूरा संसार है। मां के बारे मे क्या लिखूं । मां ने खुद मुझे लिखा है। मां भगवान का दूसरा रूप है।मौत के लिए तो कई सारे रास्ते है। पर जन्म के लिए कवेल एक मां हैं। जो मौत से जंग जीतकर हमे जन्म देती है। वो तोड़ देती खुद को तुम्हारे सर्जन के लिएवो जोक देती है खुद को तुम्हारे तर्पण के लिए।इसलिए कहती हु।मां भगवान के सामान होती है।मां भगवान का दूसरा रूप होती है। खुद गिले में सो के हमे सुखे में सुलाया।हम चैन से सो सके । खुद कई राते बिना सोए निकाली है।में मानती हु, दुनिया में कोई रिश्ता बड़ा या छोटा नहीं होता है। पर मेरी मां से बड़ा कोई रिश्ता बराबर नहीं होता है। मेरी मां सोते हुए भी।खुली आंखों से भी रात रात भर मेरा इंतजार करती है। मेरे दुख में भी मेरे से ज्यादा मेरी मां रोती है। माथा चूम के मेरा मुकद्दर मेरा बदल देती है।अपनी दुआओं से। थर्मो मीटर से भी ज्यादा टेम्परेचर अपनी हाथों से मुझे छुटे मेरी मां बता देती।मैने मोहब्बत की तमाम किताबे पढ़ डाली।पर सबसे पहले पन्ने पे कवेल एक मां का नाम पाया। वो मुझे जबसे प्यार करती है। जब प्रग्नेंसी की स्टिक पे केवल एक लकीर बन के में आई थी।हिसाब लगा के देख लो दुनिया का हर रिश्ता अधूरा निकलेगा बस आज मां का प्यार है जो औरों के प्यार से 9 महीने ज्यादा निकलेगा।एक मां ही है जोअपनी मंद मुस्करात से मेरा सारा जीवन वॉर देती है।घर में सभी हो कोई खाली पन नही लगता । पर एक मां नहीं दिखे तो पूरा घर सुना सुना सा लगता है।दवा असर ना करे तो जनाब मां नजर उतरती है। मां कभी हा नहीं मानती।जो बिना नाम के भी हर काम किए जाती है। अपने बच्चों के लिए पूरी दुनिया से उलझ जाती है।खुद भूखी रहके भी अपने बच्चों का भी पेट भरती । पूरी दुनिया साथ छोड़ देती । पर एक मां हैं।जो कभी साथ नहीं छोड़ती ।जिसमें सभी शास्त्रों का ज्ञान भंडार होता। तुम्हे क्या पता मां क्या होती है।वो पढ़ लेती तुम्हारी चाह । भाप लेती तुम्हारी राह ।वो बिना कहे तुम्हे सब समझ जाती तुम्हारी मन की व्यथा ।वो ढूंढ लेती है । कई रस्ते जिस पे तुम चल सको।वो सह लेती है ,लाखो दर्द तुम्हारी एक मुस्कान के लिए। वो सुन लेती लाखो ताने , तुम्हारे आत्म सम्मान के लिए। अंगुलियों पर रखती लाखो का हिसाब । मां तुमसे कई गुना आगे चलती है।दुनिया में केवल एक मां ही। जो में मांगती एक रोटी हमेशा 2 रोटी लाके देती है। कितना भी लिखूं कम है। सच तो ये है कि मां है तो हम है मां सबकी जगह ले लेती। पर मां की जगह कोई नहीं ले सकता। पूरी दुनिया के लिए तुम मेरी मां हो, पर मेरे लिए मेरी पूरी दुनिया हो मेरी मां
नीलम सोनी




