श्याम मंदिर में गूंजा ‘नंद के घर आनंद भयो’, जन्माष्टमी पर उमड़ा आस्था का सैलाब, हजारों लोगों ने किए दर्शन

जयपुर। जोशी मार्ग, कालवाड़ रोड, झोटवाड़ा स्थित श्री श्याम मंदिर में श्री श्याम मंदिर सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में चल रहे पंच दिवसीय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के अंतर्गत शुक्रवार को जन्माष्टमी का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा और देर रात तक ‘जय श्री कृष्ण’, ‘श्याम बाबा की जय’ तथा ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष गूंजते रहे।मंदिर महंत रामजीलाल शर्मा ने विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान श्रीकृष्ण एवं श्री श्याम प्रभु की पूजा-अर्चना कर महोत्सव का शुभारंभ किया। दिनभर मंदिर में पंचामृत अभिषेक, विशेष पूजा-अर्चना, मनोहारी श्रृंगार और आकर्षक फूल बंगला झांकी सजाई गई। रंग-बिरंगे पुष्पों से सजे मंदिर में विराजमान श्री श्याम प्रभु का अलौकिक स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
जैसे-जैसे रात्रि का समय नजदीक आया, श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर पहुंच गया। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और श्रीकृष्ण की लीलाओं का गुणगान होता रहा। मध्यरात्रि में जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का पावन क्षण आया, पूरा मंदिर परिसर भक्तिभाव में डूब गया। चारों ओर से ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष गूंज उठे। श्रद्धालुओं ने हाथ उठाकर भगवान श्रीकृष्ण का अभिनंदन किया और वातावरण जयकारों से गुंजायमान हो गया।

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के अवसर पर रंगीन आतिशबाजी ने उत्सव की भव्यता में चार चांद लगा दिए। जन्मोत्सव के पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष शेर सिंह धाकड़ ने बताया कि बारिश की बूदें भी श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण के दर्शन करने से नही रोक पाई। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद मंदिर परिसर में पूरे दिन अनुशासन, सेवा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे सभी कृष्ण भक्ति में सराबोर नजर आए। मंदिर का पूरा वातावरण ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं नंदलाल का जन्मोत्सव भक्तों के बीच साकार हो उठा हो। शेर सिंह धाकड़ ने आयोजन में सहयोग करने वाले सभी कार्यकर्ताओं, सेवाभावी भक्तों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य केवल पर्व मनाना नहीं, बल्कि समाज में भक्ति, संस्कार, सेवा, सद्भाव और आपसी भाईचारे की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। राधे-राधे और श्याम-श्याम के जयघोष के बीच सम्पन्न हुआ यह जन्माष्टमी महोत्सव श्रद्धालुओं के लिए आस्था, आनंद और आध्यात्मिक अनुभूति का अविस्मरणीय पर्व बन गया।




