“शिक्षक शिक्षा स्वास्थ और न्याय”- विनोद कुमार शर्मा

कोई भी देश उन्नति तभी कर पाता जिसकी पूंजी होती उस देश के नागरिकों की शिक्षा और उनका स्वास्थ का स्तर कितना अच्छा है और नागरिकों को न्याय कितना सरल और सुलभ है हमारे देश में राजनैतिक सोच शिक्षा और स्वास्थ के प्रति कितनी गंभीर है इसका उदाहरण इसके लिए बजट में राशि प्रावधानों से समझा जा सकता है न्याय व्यवस्था में पेंडिंग मुकदमों की बहुत बड़ी संख्या और न्यायाधीशों के खाली पद स्थिति को दर्शाते हैं
देश एक बड़ी आबादी जनसंख्या बाला है जिसे किसी छोटे यूरोपियन देश की नकल कर कॉन्वेंट शिक्षा निजीकरण शिक्षा व्यवस्था से नहीं चलाया जा सकता न ही आम आदमी मंहगे अस्पतालों में ईलाज करा सकता मौत के के हाथों हार जाता दुर्भाग्य ऐसा हो रहा देश में सरकारी स्कूलों का तेजी से बंद होना स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और शिक्षकों की कमी और शिक्षक चयन व्यवस्था में मेरिट का अभाव शोचनीय है दूर दराज ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों की कमी भवन विहीन स्कूल देश की आजादी के 80 वर्षों बाद की देश की कार्य कुशलता और विकास की गवाही देते हैं शिक्षा स्वास्थ और न्याय व्यवस्था में मेरिट के आधार पर चयन से देश को उच्च पंक्ति में पहुंचाया जा सकता ।
आजादी के अस्सी वर्षों बाद भी भारत का कोई विश्वविद्यालय शीर्ष 10 में अभी तक नहीं पहुंच पाया क्योंकि कि मैरिट शिक्षा का आधार नहीं है रोजगार की स्थिति रक्षा में अग्निवीर चार वर्षों में जितना धन प्राप्त करेंगे उससे अधिक धन फर्जी SC ST के दो केश लगाकर वर्ग विशेष लाभ उठा रहा क्योंकि फर्जी पाए जाने पर रिकवरी के प्रावधान या सजा के कोई प्रावधान नहीं हैं यह न्याय के मौलिक अधिकारों का हनन है
इस देश में शंकर जी शिष्य परशुराम के शिष्य दानवीर कर्ण गुरु द्रोणाचार्य शिष्य अर्जुन एकलव्य जैसे अनेकानेक गुरु शिष्यों का इतिहास है एसे शिष्य भी हुए जिन्होंने अपना सर्वस्व अँगूठा गुरु दक्षिणा में दिया चाणक्य ने चन्द्रगुप्त मौर्य को तराशा तो रामकृष्ण परमहंस ने विवेकानंद दिए शिक्षक दिवस पर ढेरों गुरु और अनंत शिष्य देश को प्राप्त होने की कामनाएं एवं अनन्य ज्ञात अज्ञात गुरु जनों का वंदन नमन 🙏🏻
विनोद कुमार शर्मा




