जलवायु परिवर्तन और हरित ऊर्जा की ओर बढ़ते क़दम ‘-डॉ. दक्षा जोशी ‘निर्झरा’ अहमदाबाद, गुजरात

बढ़ते वैश्विक तापमान और पर्यावरण असंतुलन ने आज पूरी दुनिया के सामने गंभीर संकट पैदा कर दिया है। 2026 में जलवायु परिवर्तन केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक स्थिरता का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। इसी चुनौती से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर पारंपरिक जीवाश्म ईंधन से दूरी बनाकर हरित और नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने की रफ्तार तेज हो गई है।
इस दिशा में कुछ प्रमुख बदलाव और प्रयास किए जा सकते हैं।
सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में अत्याधुनिक तक़नीकों का विकास, जिससे इनकी लागत कम और दक्षता बढ़ गई है।
इलेक्ट्रिक वाहनों और उन्नत बैटरी स्टोरेज़ प्रणालियों का तेज़ी से विस्तार, जिससे परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन घट रहा है।
सरकार और उद्योगों द्वारा ‘नेट-जीरो’ लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कार्बन कैप्चर और प्रकृति-आधारित समाधानों पर भारी निवेश। जल संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली को लेकर नागरिकों और स्थानीय समुदायों में जागरूकता ज़रूरी है।
पर्यावरण संरक्षण अब केवल सरकारों की ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की रोज़मर्रा की आदत बन चुका है। पृथ्वी के संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और सतत विकास ही हमारी आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की एकमात्र गारंटी है।
-डॉ. दक्षा जोशी ‘निर्झरा’
अहमदाबाद, गुजरात




