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स्वस्थ तन मन से बने सुंदर जीवन कैसे, — अलका गर्ग, गुरुग्राम

 

ये तो शास्त्रों में भी लिखा है कि पहला सुख निरोगी काया..
मतलब संसार के सब सुखों में सर्वश्रेष्ठ सुख स्वस्थ तन को माना गया है।स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन रह सकता है वरना चौबीसों घंटे मन व्याधियों की तरफ़ भागता रहता है।सोचने समझने की शक्ति क्षीण हो जाती है।दुखता अंग किसी और काम के बारे में सोचने ही नहीं देता जिसका बुरा असर घर,परिवार,
रिश्ते,नाते,काम धंधे,व्यवसाय सभी पर पड़ता है।हर वक्त चिड़चिड़ापन,
सुस्ती,क्रोध मनुष्य पर हावी रहता है।बीमारी अस्वस्थता के कारण आर्थिक स्थिति भी चरमरा जाती है।इसलिए हर हाल में शरीर को स्वस्थ रखना अति आवश्यक है।
स्वस्थ तन के लिए अपनी पौराणिक योग और व्यायाम पद्धति और मन के लिए ध्यान और प्रयाणाम पद्धति बहुत कारागर सिद्ध होती है।हल्का सुपाच्य भोजन भी तन को स्वस्थ रखने की कुञ्जी है।सुबह की सैर भी मन को ताज़गी और स्फूर्ति से भर देती है।और जब मन स्फूर्ति से भरा रहता है तो सब अच्छा लगता है ।नये नये विचार मन में आते हैं और काम में मन लगा रहता है।जीवन ख़ुशनुमा लगता है,जीने की चाह बनी रहती है।
इसके अलावा सकारात्मक सोच भी जीवन को स्वस्थ व ऊर्जावान बनाये रखती है।हर बात के अच्छे बुरे दोनों पहलू होते हैं ।धीरे धीरे अच्छे पहलू को देखने की आदत बनाना स्वस्थ मन के लिए बहुत सहायक सिद्ध होगा।
उमर कोई भी हो परंतु खुशी से चमकता हुआ चेहरा सभी को आकर्षित करता है।

अलका गर्ग, गुरुग्राम

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